Did You Know : नवजात शिशु केवल ब्लैक एंड व्हाइट नहीं देखते, शुरुआती महीनों से ही आने लगती है सही-गलत की समझ

खबर सार :-

नवजात शिशु केवल ब्लैक एंड व्हाइट नहीं देखते। नई रिसर्च के अनुसार वे शुरुआती महीनों में रंग पहचानने के साथ ही सही और गलत की बुनियादी समझ भी दर्शाते हैं।
छोटे बच्चों की देखने की क्षमता और सही-गलत की समझ पर रिसर्च

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: छोटे बच्चों की आंखों की रोशनी और उनके दिमाग के विकास को लेकर बनी पुरानी धारणाएं अब बदल रही हैं। आमतौर पर माना जाता था कि नवजात बच्चे दुनिया को सिर्फ काले और सफेद (ब्लैक एंड व्हाइट) रंग में देखते हैं, लेकिन नई रिसर्च में यह बात गलत साबित हुई है। हालांकि, जन्म के समय बच्चों के रंग देखने की क्षमता थोड़ी सीमित जरूर होती है।

शुरुआत में नवजात बच्चे गहरे रंग, खास तौर पर लाल रंग आसानी से देख पाते हैं। लेकिन उन्हें रंग उतने चमकदार और गहरे नजर नहीं आते। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी आंखों में रंगों को पहचानने वाली जो बारीक कोशिकाएं (कोन सेल्स) होती हैं, वे जन्म के समय पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं।

उम्र के साथ कैसे बदलती है बच्चों की नजर

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी देखने की क्षमता में सुधार आने लगता है। लगभग दो महीने का होने पर बच्चा लाल और हरे रंग के बीच का अंतर समझने लगता है। वहीं, चार महीने का होने तक बच्चों के रंग देखने का तरीका काफी हद तक बड़ों जैसा हो जाता है, हालांकि रंग थोड़े कम चमकदार दिखते हैं।

बच्चों में सही और गलत की शुरुआती समझ

रंगों की पहचान के अलावा, वैज्ञानिक इस बात पर भी रिसर्च कर रहे थे कि क्या छोटे बच्चों में सही और गलत की समझ होती है। पहले के मनोवैज्ञानिक मानते थे कि बच्चे बिना किसी नैतिक समझ के पैदा होते हैं और जैसे-जैसे बड़े होते हैं, समाज से सही-गलत सीखते हैं।

लेकिन हाल के अध्ययनों से पता चला है कि भले ही पूरी नैतिक समझ किशोरावस्था (टीनएज) में आती है, फिर भी छोटे बच्चों में शुरुआत से ही सही और गलत को लेकर एक बुनियादी समझ मौजूद होती है।

मददगार स्वभाव को ज्यादा पसंद करते हैं बच्चे

साल 2010 में येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 3 महीने के छोटे बच्चों पर एक प्रयोग किया। इसमें बच्चों को लकड़ी के अलग-अलग आकार वाले खिलौनों (कैरेक्टर) का एक शो दिखाया गया। इस शो में कुछ कैरेक्टर एक पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे दूसरे कैरेक्टर की मदद कर रहे थे, जबकि कुछ कैरेक्टर उसे रोक रहे थे। रिसर्च में पाया गया कि बच्चों ने मदद करने वाले कैरेक्टरों को देखना ज्यादा पसंद किया। इससे पता चलता है कि बच्चे बहुत छोटी उम्र से ही मदद करने वाले और अच्छे व्यवहार को ज्यादा पसंद करते हैं।

शिशु विकास से जुड़ी इस रिसर्च का आधार

मानव विकास और बाल मनोविज्ञान के क्षेत्र में बच्चों की क्षमताओं को लेकर समय-समय पर नई जानकारियां सामने आती रही हैं। पहले माना जाता था कि नवजात बच्चे एकदम खाली दिमाग के साथ जन्म लेते हैं। लेकिन येल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों की नई रिसर्च ने यह साफ कर दिया है कि जन्म के कुछ ही महीनों के भीतर बच्चों का  दिमाग रंगों को पहचानने और अच्छे-बुरे व्यवहार को समझने लगता है।

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