Did You Know : रात के अंधेरे में उल्लू की नजर इंसानों से क्यों होती है सौ गुना तेज, जानिए इसके वैज्ञानिक कारण

खबर सार :-

जानिए उल्लू रात के अंधेरे में इंसानों से 100 गुना बेहतर क्यों देख सकता है। उल्लू की आंखों की संरचना और वैज्ञानिक कारणों की पूरी जानकारी।
उल्लू अंधेरे में कैसे देख पाता है और इंसानी आंखें क्यों रह जाती हैं पीछे

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: उल्लू रात के घने अंधेरे में इंसानों से 100 गुना बेहतर और 100 फीट दूर तक देखने की असाधारण क्षमता रखता है। प्रकृति ने इस पक्षी को ऐसी शारीरिक बनावट दी है कि यह अंधेरे में भी अपने शिकार को आसानी से ढूंढ लेता है। प्रकृति के इस अनोखे जीव की आंखों की यह खासियत हमेशा से शोधकर्ताओं और विज्ञान प्रेमियों के लिए जिज्ञासा का विषय रही है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो उल्लू की यह क्षमता केवल एक संयोग नहीं, बल्कि इसकी शारीरिक संरचना का परिणाम है।

आंखों की कोशिकाओं का अनोखा खेल

हमारी और जीवों की आंखों के अंदर मुख्य रूप से दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें रॉड्स और कोन्स कहा जाता है। रॉड्स कम रोशनी में देखने की क्षमता प्रदान करते हैं और अंधेरे में सक्रिय रहते हैं, जबकि कोन्स उजाले में रंगों की पहचान करने में मदद करते हैं। उल्लू की आंखों में कोन्स की संख्या बेहद कम होती है, लेकिन रॉड्स की संख्या इंसानों के मुकाबले बहुत अधिक होती है। यही मुख्य कारण है कि उल्लू की नजर रात के समय इतनी अधिक तीव्र होती है, हालांकि कोन्स की कमी के चलते यह रंगों को स्पष्ट रूप से नहीं पहचान पाता है।

शरीर के वजन के अनुपात में बड़ी आंखें

उल्लू की आंखों की एक अन्य बड़ी विशेषता इसका आकार है। उल्लू की एक आंख का वजन उसके पूरे शरीर के वजन का लगभग पांच प्रतिशत होता है, जो कि बहुत बड़ा अनुपात है। इतने बड़े आकार के कारण इसकी आंखें वातावरण में मौजूद बहुत कम मात्रा में प्रकाश को भी आसानी से कैप्चर कर लेती हैं। इसके विपरीत, दिन के समय तेज सूरज की रोशनी के कारण इसकी आंखें चौंधिया जाती हैं और इसे दिन में देखने में कठिनाई होती है।

पुतलियों की बनावट और प्रकाश संवेदनशीलता

इसके अलावा, उल्लू की आंखों की पुतलियों के फैलने की क्षमता इंसानों से कहीं अधिक होती है। रात के समय हल्के से हल्का प्रकाश भी इन पुतलियों से होकर सीधे पर्दे तक पहुंच जाता है। इसकी आंख का पर्दा लेंस से थोड़ी अधिक दूरी पर होता है, जिससे उस पर बनने वाला चित्र भी बड़ा और स्पष्ट बनता है। आंखों के भीतर मौजूद प्रोटीन से बना लाल रंग का एक विशेष पदार्थ भी रात में देखना संभव बनाता है, क्योंकि इससे उल्लू की आंखें रात के प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। उल्लू निशाचर पक्षियों की श्रेणी में आता है, जिसका अर्थ है कि वे दिन के मुकाबले रात के समय अधिक सक्रिय रहते हैं। उनकी यह जैविक विशेषता उन्हें अंधेरे में शिकार करने और जीवित रहने में मदद करती है, जो विकास क्रम के दौरान उनकी प्रजाति में विकसित हुई है।

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