Did You Know : महाराष्ट्र के हरिश्चंद्रगढ़ में स्थित है प्राचीन केदाश्वर गुफा मंदिर, जानिए इसकी खास बातें
खबर सार :-
महाराष्ट्र के अहमदनगर में हरिश्चंद्रगढ़ पहाड़ी पर स्थित केदाश्वर गुफा मंदिर के बारे में जानें, जहां जल से घिरा शिवलिंग और युगों से जुड़े खंभों का रहस्य है।
खबर विस्तार : -
अहमदनगर, महाराष्ट्र : महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित हरिश्चंद्रगढ़ पहाड़ी पर एक प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद है। यह स्थान केदाश्वर गुफा मंदिर के नाम से जाना जाता है जो भगवान शिव को समर्पित है। पहाड़ी और गुफा के भीतर स्थित होने के कारण इस स्थल का अपना एक अलग महत्व है।
गुफा के भीतर स्थित शिवलिंग
यह मंदिर एक गुफा के अंदर बना हुआ है। गुफा के बिल्कुल बीचों-बीच पांच फुट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके चारों ओर हमेशा कमर जितना पानी भरा रहता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इस पानी में खड़े रहकर ही भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।
युगों से जुड़े चार खंभे और मान्यताएं
इस गुफा मंदिर की सबसे हैरान करने वाली विशेषता इसके अंदर मौजूद चार पिलर या खंभे हैं। इन चारों खंभों को लेकर एक बड़ी मान्यता प्रचलित है। इन खंभों को चार युगों यानी सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग से जोड़कर देखा जाता है।
मंदिर के खंभों का रहस्य
मान्यताओं के अनुसार, इन चार खंभों में से तीन खंभे टूट चुके हैं और वर्तमान में केवल एक ही खंबा सुरक्षित बचा है। ऐसा माना जाता है कि जब भी इनमें से एक खंभा टूटता है, तो एक युग का अंत हो जाता है। वर्तमान में जो अंतिम खंभा बचा हुआ है, उसे कलियुग का प्रतीक माना जाता है।
कलियुग के अंत से जुड़ी धारणा
स्थानीय मान्यताओं और प्रचलित कथाओं के आधार पर यह माना जाता है कि जिस दिन यह आखिरी खंभा भी टूट जाएगा, उसी दिन कलियुग का भी अंत हो जाएगा। इसी वजह से यह स्थान पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच खासी चर्चा का विषय बना रहता है। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की हरिश्चंद्रगढ़ पहाड़ी पर स्थित केदाश्वर गुफा मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, जल से घिरे शिवलिंग और युगों से जुड़े चार खंभों के रहस्यों के कारण जाना जाता है। गुफा के अंदर केवल एक बचे हुए खंभे और इसके टूटने से कलियुग के अंत की मान्यता इस मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।
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