छह की मौत के बाद हर ओर सन्नाटा, सवालों में उलझा हादसा, सड़कों पर पुलिस थी तैनात
खबर सार :-
जिस घर में कुछ दिनों पहले खुशियों की भरमार थी। पड़ोसियों के लिए वह उदाहरण बनती थी। लेकिन शनिवार को उस घर में मातम छा गया। पौड़ी के दर्दनाक सड़क हादसे ने लक्सर के एक ही परिवार को ऐसा जख्म दिया कि उसका दर्द बयां कर पाना भी मुश्किल है। वह समय ही ऐसा था, जब चारों तरफ गांव में चीज पुकार मची थी। सुबह एक-एक कर परिवार के 6 सदस्यों को गांव पहुंचाया गया तो माहौल दहल उठा।
खबर विस्तार : -
हरिद्वार। सहम उठे बच्चेएक साथ छह लोगों के मरने की खबर से गांव में कोहराम मच गया। ऐसा लगने लगा कि पूरे इलाके में आपदा आ गई है। कुछ बचा ही नहीं। अपनों के शव देखकर परिवार वालों का तो जैसे कलेजा फट पड़ा हो। गांव के लोग जो जहां थे, दौड़े चले आए। जब 6 जनाजे एक साथ घर से उठे तो मानो गांव में चारों तरफ भीड़ का सैलाब उमर पड़ा। जिसको देखो वही गमगीन था। हर तरफ ऐसी खामोशी पहले कभी देखी नहीं गई थी। हर कोई बस सवाल यही कर रहा था कि आखिर ऐसा क्या हुआ? इस परिवार पर इतनी बड़ी त्रासदी आ गई।
करीब सुबह छह बजे थे। अरमान और उनकी मां अनामिका के शव गांव पहुंचे, तो इनके शवों को देखकर एक ही परिवार का कलेजा फट गया। जैसे ही थोड़ा समय और बीता करीब चार घंटे के बाद अफजल उसके बेटे अमन और भाई फुरकान के शव गांव पहुंचाए गए। एक ही परिवार के 6 सदस्यों के शव सामने देखकर परिजनों का सब्र टूट गया। घर वाले सर पटक पटक कर अपनी किस्मत को कोस रहे थे। शायद फिर मिल जाएं, ऐसी बदहोशी की आवाज भी सुनी गई। पड़ोसियों की हालत तो यह थी कि वह उसे परिवार के लोगों को संभालने की कोशिश करने के अलावा और कुछ नहीं कर पा रहे थे।
मार्ग पर पुलिसकर्मियों को लगाया गया
गांव पहुंचते ही रिश्तेदारों को खबर भेजना शुरू किया गया, ग्रामीणों तक आवाज पहुंची तो वह दौड़े भागे चले आए। कोई इधर समझा रहा तो कोई उधर आंसू पोछ रहा था। गांव वालों ने भी इससे पहले इतना गमगीन माहौल कभी नहीं देखा था। जिस घर में कुछ दिन पहले तक खुशियां छाई थी, वहां छह जनाजो की तैयारी हो रही थी। धार्मिक रीति रिवाज पूरे होने के बाद एक साथ घर से सभी शवों को उठाया गया। गांव की गलियां लोगों से भर गई। ना कोई इस धर्म का ना कोई उस धर्म का, जो था बस इंसान।
उनके अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए आसपास के गांव से भी लोग पहुंचे। छह लोगों की अंतिम विजय विदाई देखकर बच्चे भी सहम उठे। जनाजे के साथ चल रही भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी। गांव की गलियों में अब सन्नाटा होने लगा। पुलिस प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, सब वहां मौजूद थी। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए भी अधिकारी पहुंचे हुए थे। जनाजे के मार्ग पर पुलिसकर्मियों को लगाया गया था। अंतिम विदाई में नेता, समाजसेवी और कई अधिकारी भी मौजूद रहे।
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