डिलीवरी का इंतजार, लेकिन तैयारी पूरी: Tejas Mark 1A उड़ाने के लिए प्रशिक्षित हो रहे वायुसेना के पायलट

खबर सार :-

भारतीय वायुसेना के लिए Tejas Mark 1A कार्यक्रम का उद्देश्य पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों का स्थान लेना और स्वदेशी लड़ाकू क्षमता को मजबूत करना है।
Tejas Mark 1A की डिलीवरी में देरी, पायलटों की तैयारी जारी

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना को स्वदेशी लड़ाकू विमान Tejas Mark 1A की आपूर्ति तय समय से पीछे चल रही है और अब तक एक भी विमान सेवा में शामिल नहीं हुआ है। इसके बावजूद वायुसेना ने विमान के संचालन की तैयारियां जारी रखी हैं। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, पहले बैच के कई पायलट Tejas Mark 1A उड़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं, जबकि अन्य का प्रशिक्षण अभी जारी है।

तेजस मार्क 1 पर चल रही है तैयारी

अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल प्रशिक्षण मौजूदा तेजस मार्क 1 विमान और फ्लाइट सिम्युलेटर की मदद से कराया जा रहा है। भारतीय वायुसेना के पास इस समय तेजस मार्क 1 के दो स्क्वाड्रन हैं, जो तमिलनाडु के सुलूर और राजस्थान के नाल एयरबेस पर तैनात हैं। इन्हीं ठिकानों पर पायलटों को उड़ान संचालन और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं का अभ्यास कराया जा रहा है। तेजस मार्क 1ए में तकनीकी स्तर पर कुछ नए सिस्टम और सुधार शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि पहले से तेजस मार्क 1 उड़ा रहे पायलटों को सीमित अतिरिक्त प्रशिक्षण के बाद नए संस्करण का संचालन करने में सक्षम बनाया जा सकता है।

मिग-21 के स्थान पर होगी तैनाती

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, तेजस मार्क 1ए का पहला स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना के नंबर 3 स्क्वाड्रन "कोबरा" के रूप में स्थापित किया जाएगा। यह वही इकाई है, जो पहले मिग-21 श्रृंखला से जुड़ी रही है। मिग-21 के विभिन्न संस्करणों के संचालन का लंबा अनुभव रखने वाले इस स्क्वाड्रन को अब तेजस के उन्नत संस्करण से लैस किए जाने की योजना है। वायुसेना ने 26 सितंबर 2025 को मिग-21 लड़ाकू विमान को लगभग छह दशक की सेवा के बाद औपचारिक रूप से सेवा से विदा किया था। इसके बाद इन विमानों का संचालन करने वाले पायलटों के लिए तेजस मार्क 1ए सहित अन्य आधुनिक लड़ाकू विमानों पर स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।

स्ट्रीम बदलने के लिए अलग प्रशिक्षण प्रक्रिया

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, किसी भी पायलट को एक लड़ाकू विमान से दूसरे विमान या किसी अन्य उड़ान श्रेणी में जाने के लिए निर्धारित प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करनी होती है। वायुसेना में फाइटर, फिक्स्ड-विंग ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर जैसी अलग-अलग फ्लाइंग स्ट्रीम होती हैं, जिनके लिए अलग योग्यता और प्रशिक्षण आवश्यक है। मिग-21 से दूसरे लड़ाकू विमान पर जाने वाले पायलटों को आमतौर पर तीन से छह महीने का रूपांतरण प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य नए विमान की उड़ान प्रणाली, उपकरणों और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं से उन्हें पूरी तरह परिचित कराना होता है। भारतीय वायुसेना के लिए तेजस मार्क 1ए कार्यक्रम का उद्देश्य पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों का स्थान लेना और स्वदेशी लड़ाकू क्षमता को मजबूत करना है। हालांकि विमान की डिलीवरी में देरी हुई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार वायुसेना प्रशिक्षण और परिचालन तैयारियों को निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ा रही है।

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