1975 आपातकाल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का तीखा हमला, कहा- सत्ता के अहंकार में कुचले गए थे लोकतांत्रिक मूल्य
खबर सार :-
25 जून 1975 के आपातकाल पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर साधा निशाना। 'संविधान हत्या दिवस' के मौके पर कहा कि सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक मूल्य और नागरिक अधिकार कुचले गए थे। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: भारतीय इतिहास का एक ऐसा पन्ना, जिसे जब भी पलटा जाता है, तो लोकतांत्रिक मर्यादाओं और नागरिक अधिकारों के हनन की एक भयानक तस्वीर सामने आती है। साल 1975 में देश पर थोपे गए आपातकाल की बरसी को आज देश 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मना रहा है। इस बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक मौके पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर करारा हमला बोला है। राजनाथ सिंह ने दोटूक शब्दों में कहा कि उस दौर में सत्ता के अहंकार में चूर होकर न केवल देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों को छीना गया, बल्कि भारत की महान लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान के मूल्यों को पूरी तरह कमजोर करने की साजिश रची गई थी।
आज के दिन को याद करते हुए रक्षा मंत्री ने उन संघर्षों को रेखांकित किया, जिसने भारतीय लोकतंत्र को एक नई दिशा दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतिहास की इन गलतियों से सीख लेना वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।
25 जून 1975: भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक के बाद एक कई भावुक और तीखे पोस्ट किए। उन्होंने साफ तौर पर लिखा, "25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिन था, जब देश पर आपातकाल लगाया गया।" राजनाथ सिंह के इस बयान ने एक बार फिर 51 साल पुरानी उन कड़वी यादों को ताजा कर दिया है, जब रातों-रात पूरे देश को एक खुली जेल में तब्दील कर दिया गया था।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजनाथ सिंह का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह उस दौर की प्रताड़ना को झेलने वाले लाखों लोगों की आवाज है। उस समय देश के शीर्ष विपक्षी नेताओं को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सलाखों के पीछे भेज दिया गया था।
सत्ता का अहंकार और नागरिक अधिकारों पर क्रूर प्रहार
अपने सिलसिलेवार पोस्ट में रक्षा मंत्री ने तत्कालीन शासन व्यवस्था की निरंकुशता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के अहंकार की वजह से आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का क्रूरता से हनन किया गया। प्रेस की स्वतंत्रता, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, उसे पूरी तरह कुचल दिया गया था। अखबारों पर सेंसरशिप लगा दी गई थी, जिससे जनता तक सच न पहुंच सके। राजनाथ सिंह ने उस दौर की भयावहता का जिक्र करते हुए लिखा कि हजारों राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं, निष्पक्ष पत्रकारों और निर्दोष आम नागरिकों को अकारण ही जेलों में ठूस दिया गया था। सरकार के खिलाफ उठने वाली हर असहमति की आवाज को बेरहमी से दबाया गया। रक्षा मंत्री के मुताबिक, यह भारतीय संविधान के मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं को पूरी तरह नष्ट करने का एक सुनियोजित और भरसक प्रयास था।
'संविधान हत्या दिवस' क्यों है भावी पीढ़ियों के लिए जरूरी?
केंद्र सरकार द्वारा 25 जून को आधिकारिक तौर पर 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में घोषित किए जाने के फैसले की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस काले दिन को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में स्मरण करने का जो ऐतिहासिक निर्णय लिया है, वह देश को उस दंश की याद दिलाता रहेगा।
"यह निर्णय इसलिए जरूरी था ताकि हमारी आने वाली भावी पीढ़ियां लोकतंत्र पर हुए उस भीषण प्रहार को कभी न भूलें। यह दिन केवल शोक मनाने का नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता और हमारे संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर से मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है।" - राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री
संविधान: हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की सुदृढ़ आधारशिला
राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में देश के नागरिकों को संविधान के महत्व के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में लिखा कि यह काला अध्याय हमें हर पल यह स्मरण कराता है कि भारत का संविधान हमारे देश का सबसे पवित्र ग्रंथ है। यही पवित्र ग्रंथ हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की सबसे सुदृढ़ आधारशिला भी है। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि इस संविधान की रक्षा और इसके सम्मान को बनाए रखने का दायित्व केवल सरकार का नहीं, बल्कि हम सभी देशवासियों का सामूहिक कर्तव्य है। जब तक नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग रहेंगे, देश में दोबारा कभी कोई तानाशाही ताकत सिर नहीं उठा पाएगी।
लोकतंत्र के सेनानियों के त्याग और बलिदान को शत-शत नमन
अपने वक्तव्य के समापन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह काफी भावुक नजर आए। उन्होंने आपातकाल की उस क्रूर तानाशाही के खिलाफ खड़े होने वाले वीर योद्धाओं को याद किया। राजनाथ सिंह ने आज 'संविधान हत्या दिवस' के पावन और ऐतिहासिक अवसर पर उन सभी लोकतंत्र के सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया, जिन्होंने आपातकाल की तानाशाही के दौर में घोर संघर्ष किया, अमानवीय यातनाएं सहीं, लेकिन झुकना स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि इन सेनानियों ने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया था। आज देश जिस खुली हवा में सांस ले रहा है, वह उन्हीं के संघर्षों का परिणाम है। रक्षा मंत्री ने अंत में जोर देकर कहा कि इन महान नायकों का साहस, अद्वितीय त्याग और अमर बलिदान हमें देश सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।
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