भारतीय नौसेना में शामिल हुआ एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि', पूर्वी समुद्री मोर्चे पर बढ़ेगी भारत की ताकत

खबर सार :-

नेवी कैप्टन विवेक मधवाल ने कहा कि हमारी नौसेना हिंद महासागर में लगातार मौजूद रहती है, चाहे वह फारस की खाड़ी हो या मलक्का जलडमरूमध्य। जब भी कोई संकट आता है चाहे वह लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान हो या मानवीय सहायता पहुँचाने का काम, हमारी नौसेना हमेशा सबसे आगे रहती है। INS महेंद्रगिरि के शामिल होने से हमारी नौसेना की क्षमताएं, मूल्य और प्रतिबद्धता और मजबूत होंगे।
भारतीय नौसेना में शामिल हुआ एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि', पूर्वी समुद्री मोर्चे पर बढ़ेगी भारत की ताकत

खबर विस्तार : -

विशाखापत्तनम: भारतीय नौसेना को अपनी समुद्री शक्ति बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट 'महेंद्रगिरि' को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया। इस अत्याधुनिक युद्धपोत के शामिल होने से पूर्वी समुद्री तट पर भारत की रणनीतिक क्षमता, समुद्री निगरानी और हिंद महासागर क्षेत्र में ऑपरेशनल पहुंच को नई मजबूती मिलेगी। महेंद्रगिरि को नौसेना के पूर्वी बेड़े का हिस्सा बनाया गया है, जहां इसकी तैनाती समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र का सामरिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में महेंद्रगिरि का नौसेना में शामिल होना न केवल समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और भारत के समुद्री हितों की रक्षा में भी अहम योगदान देगा। यह युद्धपोत अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर स्टेल्थ क्षमता और बहुआयामी युद्धक प्रणाली से लैस है, जिससे यह विभिन्न प्रकार के सैन्य और मानवीय अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकेगा।

निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग

प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी का छठा स्टेल्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि भारतीय रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह केवल एक आधुनिक युद्धपोत नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' अभियान और देश की स्वदेशी इंजीनियरिंग क्षमता का मजबूत प्रतीक भी है। लगभग 6,670 टन वजनी इस फ्रिगेट को भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने किया है।

महेंद्रगिरि का डिजाइन पिछली पीढ़ी के युद्धपोतों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत माना जा रहा है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इस परियोजना से देशभर के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी जुड़े रहे, जिन्होंने विभिन्न उपकरणों और प्रणालियों के निर्माण में योगदान दिया। इससे रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों को भी नई गति मिली है।

क्या है इसकी खासियत

इस युद्धपोत में संयुक्त डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो इसे उच्च गति के साथ लंबी दूरी तक संचालन करने में सक्षम बनाती है। महेंद्रगिरि को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह समुद्र में लंबे समय तक तैनात रहकर बहुआयामी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे सके। इसकी स्टेल्थ तकनीक दुश्मन के रडार से बचने में मदद करती है, जिससे युद्ध के दौरान इसकी प्रभावशीलता और बढ़ जाती है।

महेंद्रगिरि का हथियार तंत्र भी अत्यंत आधुनिक और विश्वस्तरीय है। इसमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली और उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल है। इन सभी हथियारों और सेंसरों को अत्याधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से एकीकृत किया गया है, जिससे युद्ध की स्थिति में चालक दल तेजी और सटीकता के साथ किसी भी खतरे का मुकाबला कर सकता है।

यह स्टेल्थ फ्रिगेट केवल युद्ध अभियानों तक सीमित नहीं है। इसका लचीला मिशन प्रोफाइल इसे मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री गश्त, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, खोज एवं बचाव अभियान तथा समुद्री सुरक्षा से जुड़े अन्य अभियानों के लिए भी उपयुक्त बनाता है। यही कारण है कि महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के बहुउद्देशीय और अत्याधुनिक युद्धपोतों में शामिल किया जा रहा है।

लगातार अपडेट हो रही भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना लगातार अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर रही है। पिछले एक वर्ष के दौरान नौसेना ने 12 नए युद्धपोत, एक पनडुब्बी और एक एयरक्राफ्ट स्क्वाड्रन को अपने बेड़े में शामिल किया है। इससे भारत की समुद्री युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महेंद्रगिरि का निर्माण भी अपनी श्रेणी के अन्य जहाजों की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत कम समय में पूरा किया गया, जो भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग की दक्षता और तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।

पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर इस युद्धपोत का नाम रखा गया है। यह नाम भारतीय सांस्कृतिक विरासत और समुद्री परंपरा का प्रतीक माना जाता है। अपनी अत्याधुनिक तकनीक, स्वदेशी निर्माण, शक्तिशाली हथियार प्रणाली और बहुआयामी संचालन क्षमता के साथ महेंद्रगिरि भारतीय नौसेना की युद्धक शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए तैयार है। इसके शामिल होने से न केवल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और मजबूत होगी, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमताओं का भी एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरेगा।

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