महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 940 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
खबर सार :-
महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़े कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगभग ₹940.77 करोड़ की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से ज़ब्त कर लिया है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़े कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 940.77 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने की है। एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित अवैध सट्टेबाजी से अर्जित धन के निवेश और उसके जरिए बनाई गई संपत्तियों की जांच के क्रम में की गई है।
कई राज्यों में दर्ज मामलों के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियां विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों तथा उनके स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों से संबंधित हैं। इनमें आवासीय मकान, भूमि के भूखंड, इक्विटी शेयर, अन्य प्रतिभूतियां और विभिन्न निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि इन संपत्तियों का संबंध कथित तौर पर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी से अर्जित धन से है।
ईडी ने इस मामले की जांच छत्तीसगढ़ के दुर्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इसके अलावा छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में दर्ज अन्य एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया। इन मामलों में अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के संचालकों, प्रमोटरों और उनके सहयोगियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी तथा अवैध वित्तीय गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं।
विदेश से संचालित होता था नेटवर्क
जांच के दौरान ईडी को पता चला कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़ा कथित बेटिंग सिंडिकेट विदेश से संचालित फ्रेंचाइजी आधारित 'पैनल' नेटवर्क के जरिए काम करता था। एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग एजेंटों और फ्रेंचाइजी के माध्यम से देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क फैलाया गया था। ईडी का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध कमाई की जाती थी।
मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अपनाई गई जटिल व्यवस्था
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से अर्जित कथित अवैध धन को वैध दिखाने के लिए बहुस्तरीय और जटिल वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी के मुताबिक, नकद लेनदेन, शेल कंपनियों, फर्जी अकाउंटिंग एंट्रियों, बेनामी बैंक खातों और कई स्तरों वाले वित्तीय ट्रांजैक्शन के जरिए धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि 940.77 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय विकास गर्ग के स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों तक पहुंचाई गई। इसके बाद इस धन को विभिन्न कंपनियों के जरिए आगे ट्रांसफर किया गया और शेयरों, प्रतिभूतियों तथा अन्य अचल संपत्तियों में निवेश कर उसे वैध स्वरूप देने की कोशिश की गई।
क्या हैं मामले में आरोप?
ईडी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक ऐप को कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों और ऐप्स के संचालन में सहायता देने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। आरोप है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को जोड़ा जाता था, वित्तीय लेनदेन का प्रबंधन किया जाता था और ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का संचालन किया जाता था। एजेंसी का कहना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से बड़े पैमाने पर अवैध सट्टेबाजी का कारोबार संचालित किया गया।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सौरभ चंद्राकर समेत अन्य आरोपियों ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भारी मात्रा में कथित अवैध कमाई की। इसके बाद इस धन को बेनामी बैंक खातों, शेल कंपनियों और जटिल वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
ईडी ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, कंपनियों, वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी अटैचमेंट और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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