आयुष्मान भारत डिजिटल मिशनः जेपी नड्डा ने की प्रगति की समीक्षा, भविष्य को लेकर बनी रणनीति
खबर सार :-
मिशन संचालन समूह ने पिछली समीक्षा बैठक के बाद लिए गए निर्णयों पर हुई प्रगति का भी आकलन किया। बैठक में राज्यों में क्षमता निर्माण, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म का विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के साथ एकीकरण, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की भागीदारी बढ़ाने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की तीसरी मिशन संचालन समूह (एमएसजी) बैठक की अध्यक्षता करते हुए देश में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और तकनीक-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अब मिशन के अगले चरण में पूरे देश में इसके व्यापक उपयोग और अपनाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा
बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, अनुप्रिया पटेल और जितिन प्रसाद सहित नीति आयोग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए), आयुष मंत्रालय तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक हुई प्रगति, भविष्य की रणनीति और राज्यों के साथ समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर देश की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित, डिजिटल और सहमति-आधारित पहुंच उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को कहीं भी और कभी भी बेहतर उपचार मिल सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन के अनुरूप स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम न केवल मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान करेगा, बल्कि डॉक्टरों, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय भी मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यदि तकनीक को समावेशी, सुलभ और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाए तो यह 'यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज' के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पारदर्शी और सुविधाजनक हुई उपचार प्रक्रिया
बैठक में अधिकारियों ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक हासिल की गई उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की। बताया गया कि एबीडीएम दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में से एक बनकर उभरा है। अब तक देशभर में 93.95 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) नंबर बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही 105 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किए जा चुके हैं, जिससे नागरिकों को अपने मेडिकल रिकॉर्ड तक सुरक्षित डिजिटल पहुंच मिल रही है।
अधिकारियों ने बताया कि नेशनल डिजिटल हेल्थ रजिस्ट्री में अब तक 5.33 लाख स्वास्थ्य संस्थान और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा 2.72 लाख स्वास्थ्य संस्थानों ने एबीडीएम समर्थित सॉफ्टवेयर को अपनाया है। इससे अस्पतालों, क्लीनिकों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के बीच डिजिटल समन्वय मजबूत हुआ है।
बैठक में यह भी बताया गया कि अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण को अधिक सरल और तेज बनाने के लिए अब तक लगभग 24 करोड़ 'स्कैन एंड रजिस्टर' टोकन जारी किए जा चुके हैं। इस सुविधा के माध्यम से मरीज बिना लंबी प्रक्रिया के डिजिटल माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं और उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सुरक्षित एवं सहमति-आधारित आदान-प्रदान संभव हो रहा है। इससे उपचार प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनी है। सदस्यों ने इन क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
भविष्य में होगा AI का इस्तेमाल
बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही 'मॉडल डिस्ट्रिक्ट', 'मॉडल फैसिलिटी' और 'आरोग्य सेतु 2.0' जैसी पहलों की भी सराहना की गई। साथ ही आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई), केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) और निक्षय जैसी प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के बेहतर एकीकरण को स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
बैठक के अंत में मिशन के भविष्य के रोडमैप पर भी चर्चा हुई। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने, डिजिटल हेल्थ मानकों को मजबूत करने, विभिन्न प्लेटफॉर्मों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करने तथा राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जो प्रत्येक नागरिक को तेज, सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए तथा भारत को डिजिटल स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाए।
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