राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को होगी अहम सुनवाई, सीबीआई के नेतृत्व में एसआईटी जांच की मांग
खबर सार :-
अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला मामले (Ram Mandir donation scam case) में सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। वकीलों ने याचिका दायर कर सीबीआई (CBI) के नेतृत्व में एसआईटी जांच और वित्तीय पारदर्शिता की मांग की है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Ram Mandir) में चढ़ावे और दान के पैसों में कथित हेराफेरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के नेतृत्व वाली एक विशेष जांच टीम (SIT) से कराने की मांग वाली याचिका पर आगामी 13 जुलाई को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। अदालत के इस कदम पर देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हुई हैं।
करोड़ों लोगों की गहरी आस्था और भावनाएं जुड़ी
न्यायालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ (Bench) 13 जुलाई को इस याचिका पर दलीलें सुनेगी। यह याचिका कानूनी बिरादरी से जुड़े दो वकीलों, अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई है। इस याचिका (Petition) के जरिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की गुहार लगाई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में इस तरह की किसी भी वित्तीय गड़बड़ी (Financial Irregularity) को पूरी तरह रोकने के लिए एक बेहद पारदर्शी और सुप्रबंधित व्यवस्था बनाई जानी अनिवार्य है, क्योंकि इस पावन स्थल से करोड़ों लोगों की गहरी आस्था और भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
याचिका में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख किया गया है कि दान की चोरी या हेरफेर से जुड़ी ये खबरें चाहे पूरी तरह सच हों या अफवाह, लेकिन इन्होंने उन अनगिनत राम भक्तों के विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाई है जिन्होंने अयोध्या के वैभव को वापस लाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया है। इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित मौजूदा एसआईटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि राज्य सरकार की इस समिति ने बिना कोई औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज किए ही अपनी पड़ताल शुरू कर दी है, जो कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से अधूरी लगती है। याचिका में मांग की गई है कि ट्रस्ट के खातों से कथित तौर पर गायब हुई धनराशि और अन्य प्रशासनिक कमियों की जांच पूरी तरह से स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, जिसके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों को सुलझाने का पुराना अनुभव और विशेषज्ञता हो।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले की शुरुआती जांच के लिए जो तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई गई है, उसमें लखनऊ के क्षेत्रीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।
अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग
इस याचिका से पहले भी, शीर्ष अदालत के समक्ष एक अन्य कानूनी विशेषज्ञ अनूप अवस्थी द्वारा पत्र लिखकर इस पूरे विवाद पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लेने और अदालत की सीधी निगरानी में जांच कराने की मांग की जा चुकी है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अस्तित्व में आए इस ट्रस्ट के तहत मंदिर का संचालन हो रहा है। 22 जनवरी 2024 को भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से ही यहाँ प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं और दिल खोलकर दानपात्रों में अर्पण कर रहे हैं। ऐसे में, मंदिर के पूर्व कर्मचारियों और कुछ संदिग्धों के पास से आय से अधिक संपत्ति मिलने की खबरों ने सबको चौंका दिया है। पत्र में अंदेशा जताया गया है कि बिना सख्त एफआईआर और केवल प्रशासनिक स्तर की जांच के भरोसे रहने से समय के साथ इस बड़े मामले को दबाया जा सकता है, इसलिए इस पर तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।
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