Jagannath Rath Yatra 2026: रथ निर्माण से सजावट तक, पुरी में अंतिम चरण में पहुंची जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां

खबर सार :-

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की यात्रा दुनिया भर में मशहूर है और ओडिशा के पुरी में हर साल एक भव्य रथ यात्रा आयोजित की जाती है। भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की एक झलक पाने के लिए लाखों भक्त इस रथ यात्रा में शामिल होते हैं।
Jagannath Rath Yatra 2026: रथ निर्माण से सजावट तक, पुरी में अंतिम चरण में पहुंची जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां

खबर विस्तार : -

Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां आखिरी चरण में हैं। अभी भगवान जगन्नाथ के तीनों रथों के एक अहम लकड़ी के हिस्से, 'थेकेरा बाड़ा' को बनाने का काम तेजी से चल रहा है। भगवान जगन्नाथ की सेवा में लगे लगभग 40 कलाकार मंदिर, रथों और उत्सव के रास्ते को पारंपरिक 'झोटी चिता' से सजा रहे हैं। 

युद्ध स्तर पर चल रही हैं तैयारियां

श्री जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार ने कहा, "इस साल की रथ यात्रा की तैयारियां आखिरी चरण में हैं। हमने सभी रस्मों को समय पर पूरा करने पर सबसे ज़्यादा जोर दिया है और विस्तृत इंतज़ामों के साथ कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया है।" उन्होंने बताया कि 14 जुलाई को नबजौबन दर्शन और रथ उत्सव से पहले सभी रस्मों का शेड्यूल, भक्तों के लिए सुविधाएं, सिक्योरिटी इंतजाम और ट्रैफिक मैनेजमेंट को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। जबकि श्री गुंडिचा मंदिर में बड़े पैमाने पर सजावट और बुनियादी ढांचे का काम भी पूरा हो चुका है।

तालध्वज रथ से जुड़े सेवक बालकृष्ण महाराणा ने कहा, "अभी रथ पर 'थेकेरा बाडा' लगाया जा रहा है।  मुख्य आकर्षण, 'रथ पावा' को पहले ही पेंट किया जा चुका है और इसे सोमवार को लगाया जाएगा।" उन्होंने बताया कि उनका खास कार्य उस समय रहेगा, जब तीनों रथों के आसन लगाए जाएंगे। कार्यक्रम का समापन 'हरि बोल' के जाप और भगवान से की जाने वाली प्रार्थना के साथ होगा, जिसमें सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाएगी ताकि वे अगले साल फिर से उनकी सेवा करने के लिए लौट सकें।

रथ बनाने के कार्य में जुटे छात्र ने क्या बताया

आर्ट कॉलेज के कलाकार और छात्र दीप्तारंजन नायक, जो रथ बनाने के काम में शामिल हैं, ने कहा, "मैं हर साल यहां काम करने आता हूं। मैं लगभग छह वर्षों से यहां काम कर रहा हूं, और मुझे यह मौका सिर्फ़ भगवान जगन्नाथ की कृपा से मिला है। यहां सेवा करने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता, इसलिए मैं बहुत खुश हूं।"  उन्होंने आगे कहा, "हम 1 जुलाई को यहां पहुंचे थे और बारिश हो रही थी। हम सोच रहे थे कि काम कैसे होगा। हमने भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना की। भगवान की कृपा से, जिस दिन हमने प्रार्थना की, उसी दिन बारिश रुक गई और हमने अपना काम शुरू कर दिया।"

पुरी में 16 जुलाई से होगा रथ यात्रा का शुभारंभ

बता दें कि पुरी रथ यात्रा 2026 का शुभारंभ 16 जुलाई से होगा और 27 जुलाई को नीलाद्रि बिजे रस्म के साथ समापन होगा। इस दौरान बहुदा यात्रा 24 जुलाई और सुना बेश 25 जुलाई जैसी मुख्य रस्में निभाई जाएंगी। रथ यात्रा के दौरान, भक्त तीन विशाल लकड़ी के रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर ले जाएंगे। इन रथों पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा सवार होंगे। देवता वहां एक हफ़्ते तक रहते हैं और फिर जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए मंदिर प्रशासन, ओडिशा सरकार, पुलिस, सेवकों और स्थानीय निवासियों के मदद से व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

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