योगिनी एकादशी पर महाकाल के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में हुए शामिल
खबर सार :-
Yogini Ekadashi 2026: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी के अवसर पर, विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित भस्म आरती में हजारों भक्त शामिल हुए। बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन पाने के लिए मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
खबर विस्तार : -
Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी के शुभ अवसर पर उज्जैन के बाबा महाकालेश्वर मंदिर (Mahakal Temple) में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार तड़के आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। शुक्रवार सुबह तड़के 4:00 बजे जैसे ही मंदिर के कपाट खुले पूरा परिसर "जय महाकाल" के जयकारों से गूंज उठा और भक्तों ने भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन कर आध्यात्मिक पुण्य लाभ प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने लिया बाबा महाकाल का आशीर्वाद
भस्म आरती की शुरुआत परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाकर और 'हरिओम' जल अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद वैदिक मंत्रों के जाप के बीच भगवान महाकाल (Mahakal Temple) का ध्यान किया गया। कपूर की आरती संपन्न होने के बाद, ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढका गया और पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार रूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं; इसलिए, इस आरती का विशेष महत्व है। वहीं योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) के मौके पर आयोजित इस खास भस्म आरती में शामिल होकर भक्तों ने भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
योगिनी एकादशी पर हुआ बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार
भस्म अर्पित करने के बाद, बाबा महाकाल का भव्य और मनमोहक श्रृंगार किया गया। महाकाल के मस्तक पर चंद्र, रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा रंग-बिरंगे पुष्पों से अलंकरण किया गया। दिव्य आभूषणों और पुष्पों से सुसज्जित बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस दौरान मंदिर के अंदर और आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के कड़े इंतजाम किए गए थे।
विधिवत की गई देवी-देवताओं की पूजा
योगिनी एकादशी पर भस्म आरती से पहले गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं की विधिवत पूजा की गई। इसके बाद, भगवान महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया गया। इस दौरान भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा।
खबरों की माने तो पहले महाकाल को श्मशान की राख चढ़ाई जाती थी, लेकिन अब जो पवित्र भस्म इस्तेमाल होती है, उसे खास तौर पर कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना ज़रूरी है। बाबा महाकाल की आरती देश-विदेश में मशहूर है और इसमें आम लोगों से लेकर जानी-मानी हस्तियां तक शामिल होती हैं।
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