सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पर एनएचआरसी सख्त, 8 राज्यों के डीजीपी को भेजा नोटिस, मेटा को दी चेतावनी

खबर सार :-

फेसबुक-इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण व आपत्तिजनक सामग्री के प्रचार-प्रसार को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 8 राज्यों के डीजीपी को नोटिस भेजा है। एनएचआरसी ने मेटा इंडिया को भी नोटिस जारी कर चेतावनी दी है।
आपत्तिजनक सामग्री पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का रूख कड़ा

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री के प्रचार प्रसार को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रूख अपनाया है। इस मामले में आयोग ने संबंधित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर कार्रवाई की मांग की है। आयोग ने डीजीपी के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मेटा को भी नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स का संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई शुरू की है। दरअसल,  मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर विज्ञापनों के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि बीते सप्ताह भर में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री (सीएसईएएम) के 50 से अधिक मामलों की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मिल चुकी है। कानूनगो ने इन घटनाओं के संबंध में दिल्ली, पंजाब, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत कई अन्य प्रदेशों के डीजीपी को नोटिस जारी किया है। 

एनएचआरसी ने एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश 

एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "पिछले एक सप्ताह में इंस्टाग्राम पर सीएसईएएम (बच्चों का यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री) के 50 से अधिक मामलों की शिकायत आ चुकी हैं। प्राप्त जानकारी के आधार हमने पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार के पुलिस प्रमुखों को नोटिस जारी कर एफआईआर दर्ज करने और कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।

 मेटा इंडिया को नोटिस जारी कर भारत का कानून मानने की दी चेतावनी 

प्रियंक कानूनगो ने आगे जानकारी दी कि हमने मेटा इंडिया को भी नोटिस जारी कर स्वयं में सुधार करने और भारत का कानून मानने के लिए चेतावनी दी है। प्रियांक कानूनगो ने इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी आगाह किया है। इससे पहले, बुधवार को प्रियंक कानूनगो ने कहा, "इंस्टाग्राम और मेटा के अन्य प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के बारे में मिली शिकायतों के आधार पर हमने छह राज्यों के डीजीपी को पत्र लिखकर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री अपलोड होना उस प्लेटफॉर्म की लापरवाही 

उन्होंने कहा कि बच्चों का यौन शोषण, ऐसी हरकतों की वीडियो बनाने और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने में शामिल हैं। ये अपराध की तीन अलग-अलग श्रेणियां हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। हमने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया है। कानूनगो ने कहा कि इस तरह की सामग्री सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड होना उस प्लेटफॉर्म की लापरवाही को दर्शाता है। बीबीसी मामले में भी हमने संज्ञान लिया और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा था। समय पर एफआईआर और जांच रिपोर्ट न मिलने पर हमने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को समन भेजा और आयोग में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।

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