सुप्रीम कोर्ट से अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगाई रोक
खबर सार :-
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को जमीन कब्जाने के मामले में अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कोर्ट ने जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल में कथित सरकारी जमीन कब्जाने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे बेचने के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत सशर्त है और सुमित रॉय को जांच एजेंसी के साथ पूरी तरह सहयोग करना होगा।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहाना की पीठ ने सुमित रॉय की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। यह याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दायर की गई थी।
जांच में सहयोग की शर्त पर मिली राहत
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुमित रॉय को जांच में पूर्ण सहयोग करना होगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी जब भी बुलाए, उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा और किसी भी वकील या अन्य व्यक्ति को साथ लाने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने अपने आदेश में कहा, "याचिकाकर्ता जांच में पूरा सहयोग करेगा। वह किसी वकील या अन्य व्यक्ति के साथ नहीं आएगा। वह सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सामान्य ब्रेक के साथ जांच के लिए उपलब्ध रहेगा। इस अवधि में उसकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।"
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी पर रोक केवल जांच में सहयोग करने की शर्त के साथ प्रभावी रहेगी। यदि जांच में सहयोग नहीं किया गया तो एजेंसी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है।
विशेष अनुमति याचिका पर जारी हुआ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। फिलहाल अदालत ने मामले में अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन अगली सुनवाई तक उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को भरोसा दिलाया कि उनके मुवक्किल जांच एजेंसी के समक्ष पेश होंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे। इसी आश्वासन के बाद अदालत ने गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की थी अग्रिम जमानत
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और गिरफ्तारी से राहत की मांग की। अब शीर्ष अदालत के आदेश के बाद उन्हें अस्थायी राहत मिल गई है, हालांकि उन्हें जांच प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होना होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले के सालबोनी थाना क्षेत्र में दर्ज एक कथित सरकारी जमीन कब्जाने के मामले से जुड़ा है। आरोप है कि सुमित रॉय ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया और बाद में उसे बेच दिया। शिकायत मिलने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान जब पुलिस सुमित रॉय के दर्ज पते पर पहुंची तो वे वहां नहीं मिले। इसके बाद स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।
मामले की जांच बाद में पश्चिम बंगाल पुलिस की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दी गई। सीआईडी ने जून महीने में उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था ताकि देश छोड़ने की स्थिति में उन्हें रोका जा सके।
अभिषेक बनर्जी के आवास पर भी हुई थी छापेमारी
जांच के दौरान पुलिस ने जून में कोलकाता के कालीघाट स्थित टीएमसी नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया था। इसके अलावा हुगली जिले के सेरामपुर स्थित सुमित रॉय के ससुराल में भी छापेमारी की गई थी। हालांकि इन दोनों स्थानों पर पुलिस को सुमित रॉय नहीं मिले थे। उनके लंबे समय तक सामने नहीं आने के कारण जांच एजेंसियों ने उन्हें फरार बताते हुए तलाश तेज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद सुमित रॉय को जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होकर पूछताछ में सहयोग करना होगा। जब तक वे अदालत की शर्तों का पालन करेंगे, तब तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
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