केदारनाथ धाम में ‘ऑपरेशन कालनेमि’ तेज, फर्जी साधुओं पर कार्रवाई, 15 लोगों के चालान

खबर सार :-

‘ऑपरेशन कालनेमि’ के जरिए प्रशासन का लक्ष्य केदारनाथ धाम की धार्मिक गरिमा बनाए रखना, यात्रियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और तीर्थयात्रा को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना है।
केदारनाथ धाम में ‘ऑपरेशन कालनेमि’ तेज, फर्जी साधुओं पर कार्रवाई, 15 लोगों के चालान

खबर विस्तार : -

देहरादून: उत्तराखंड प्रशासन ने केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत निगरानी और जांच अभियान तेज कर दिया है। इस अभियान के दौरान साधु-संतों का रूप धारण कर श्रद्धालुओं को ठगने, अवैध गतिविधियों में शामिल होने या यात्रियों का शोषण करने वाले संदिग्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

सभी दस्तावेजों की हो रही जांच

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में यात्रियों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है। इसी क्रम में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, ताकि धाम क्षेत्र में किसी भी तरह की अव्यवस्था या धोखाधड़ी की घटनाओं को रोका जा सके।

‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत केदारनाथ धाम में रहने वाले साधु-संतों और अन्य व्यक्तियों के पहचान दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना है जो बिना सत्यापन के धाम क्षेत्र में रह रहे हैं या धार्मिक वेशभूषा का गलत इस्तेमाल कर श्रद्धालुओं को भ्रमित कर रहे हैं।

केदारनाथ पुलिस चौकी ने यात्रा मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान धाम क्षेत्र में मौजूद साधुओं के पहचान पत्र, आधार कार्ड और पुलिस सत्यापन संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान कई ऐसे लोग मिले जिनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं थे या जिनका पुलिस सत्यापन पूरा नहीं हुआ था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान कुल 15 व्यक्तियों के चालान किए गए। वहीं, जिन लोगों के पास वैध पहचान पत्र नहीं मिले, उन्हें सुरक्षा कारणों से केदारनाथ धाम क्षेत्र से वापस गौरीकुंड भेज दिया गया।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर खास फोकस

प्रशासन का कहना है कि चार धाम यात्रा के दौरान किसी भी व्यक्ति को बिना उचित पहचान और सत्यापन के धाम क्षेत्र में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

उत्तराखंड सरकार ने जुलाई 2025 में ‘ऑपरेशन कालनेमि’ की शुरुआत की थी। इस राज्यव्यापी अभियान का उद्देश्य धार्मिक पहचान का गलत इस्तेमाल कर लोगों को ठगने वाले व्यक्तियों की पहचान करना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना है। अभियान के तहत फर्जी बाबाओं, संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों और बिना सत्यापन के रह रहे व्यक्तियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

प्रशासन के मुताबिक, केदारनाथ जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी है। भारी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोकना प्रशासन की प्राथमिकता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में भी अचानक निरीक्षण अभियान जारी रहेगा। धाम क्षेत्र में रहने वाले सभी व्यक्तियों के दस्तावेजों की नियमित जांच की जाएगी। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और प्रशासन को दें। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा सीजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

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