हिमाचल प्रदेश में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, सुक्खू सरकार ने लगाया 60 पैसे प्रति लीटर उपकर
खबर सार :-
हिमाचल में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने 60 पैसे प्रति लीटर का उपकर लगाया है। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है।
खबर विस्तार : -
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल महंगे हो गए हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद, मंगलवार आधी रात से दोनों तरह के ईंधन पर 60 पैसे प्रति लीटर का 'अनाथ और विधवा उपकर' लागू हो गया है। इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा है। सरकार का कहना है कि इस सेस से इकट्ठा होने वाली पूरी रकम अनाथों और विधवाओं की भलाई के लिए इस्तेमाल की जाएगी। हालांकि, महंगाई से जूझ रही जनता के लिए ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।
शिमला में पेट्रोल की कीमत अब 103.05 रुपये प्रति लीटर हो गई है; पहले यह 102.45 रुपये प्रति लीटर थी, यानी इसमें 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। नई व्यवस्था के तहत, पेट्रोल पंपों पर हर बिक्री के समय यह सेस अलग से नहीं वसूला जाएगा; इसके बजाय, इसे राज्य के भीतर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की 'पहली बिक्री' के चरण में 60 पैसे प्रति लीटर की दर से लगाया जाएगा।
'अनाथ और विधवा कल्याण कोष' में जमा की जाएगी रकम
सरकार ने राज्य कर और आबकारी विभाग के माध्यम से इस सेस के लिए नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सेस पहली बिक्री के समय लागू होता है, और इससे मिलने वाली रकम एक खास 'अनाथ और विधवा कल्याण कोष' में जमा की जाएगी। इस कोष का इस्तेमाल अनाथों और विधवाओं की भलाई के लिए बनी योजनाओं में किया जाएगा।
बजट सत्र के दौरान पारित किया गया था बिल
इस सेस का प्रावधान हिमाचल प्रदेश मूल्य वर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत लाया गया था। यह बिल इस साल की शुरुआत में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पारित किया गया था, और राज्यपाल की मंजूरी के बाद अप्रैल 2026 में यह कानून लागू हुआ। यह कानून सरकार को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर 5 रुपये प्रति लीटर तक का सेस लगाने का अधिकार देता है, जिसकी वास्तविक दर सरकार नोटिफिकेशन के जरिए तय करती है। फिलहाल, सरकार ने दर 60 पैसे प्रति लीटर तय की है।
वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए लगाया सेस
सरकार के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में अनाथों और आर्थिक रूप से कमजोर विधवाओं के लाभ के लिए पहले से ही कई योजनाएं चल रही हैं। इन योजनाओं के लिए अलग और स्थायी वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है। विधानसभा में संबंधित बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस सेस (उपकर) से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अनाथों और विधवाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने में किया जाएगा।
जरूरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है असर
हालांकि, ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल भरवाने की लागत तक ही सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ने से माल ढुलाई के खर्च, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की कई जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे समय में जब आम जनता पहले से ही बढ़ते खर्चों से जूझ रही है, पेट्रोल और डीज़ल पर 60 पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त सेस उनके बजट पर एक और छोटा सा बोझ डालता है। सरकार का कहना है कि इससे इकट्ठा होने वाली पूरी रकम समाज के कमज़ोर वर्गों के कल्याण पर खर्च की जाएगी।
जयराम ठाकुर ने सरकार पर साधा निशाना
विपक्ष के नेता और बीजेपी नेता जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे का सेस लगाने को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब सरकार लोगों पर तरह-तरह की फीस और टैक्स का बोझ डाल रही है। ठाकुर ने बुधवार को कहा कि सरकार पहले ही दो बार वैट (VAT) बढ़ा चुकी है और अब पेट्रोल-डीजल पर 60 पैसे का सेस लगा दिया गया है। उन्होंने इस कदम को 'अनाथ और विधवा सेस' के नाम पर जनता से पैसे वसूलकर सरकार चलाने की कोशिश बताया।
FAQ
1. हिमाचल सरकार ने क्यों बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए फंड जुटाने के मकसद से पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का 'अनाथ और विधवा सेस' (Orphan and Widow Cess) लगाया है।
2. हिमाचल प्रदेश में अब पेट्रोल और डीजल की क्या कीमत है?
पेट्रोल की कीमत लगभग ₹103.05 प्रति लीटर और डीजल की कीमत लगभग ₹95.21 प्रति लीटर हो गई है।
3. आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण ट्रांसपोर्टेशन, रोजाना आने-जाने और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतों और यात्रा के खर्च पर पड़ेगा।
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