म्यांमारः सुपारी तस्करी और मनी लाॅन्ड्रिंग के खिलाफ ईडी का बड़ा एक्शन, चम्फाई में 9 स्थानों पर छापेमारी

खबर सार :-
म्यांमार से सूखे सुपारी की तस्करी और मनी लाॅन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चम्फाई जिले के 9 स्थानों पर छापेमारी की। एजेंसी ने इस मामले में 970 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता लगाया है।
म्यांमारः सुपारी तस्करी और मनी लाॅन्ड्रिंग के खिलाफ ईडी का बड़ा एक्शन, चम्फाई में 9 स्थानों पर छापेमारी
खबर विस्तार : -

आइजोल: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने म्यांमार से सूखे सुपारी की कथित तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिजोरम के चम्फाई जिले में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया है।

केंद्रीय एजेंसी ने जिले में नौ अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की और कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने इस मामले में 970 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया है।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा

ED के आइजोल सब-रीजनल ऑफिस द्वारा चलाए गए इस ऑपरेशन में तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के शक वाले व्यापारियों और अन्य लोगों के घरों और व्यावसायिक ठिकानों की तलाशी ली गई। एजेंसी के मुताबिक, यह जांच अगस्त 2024 में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज की गई FIR पर आधारित है। यह FIR गुवाहाटी हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद दर्ज की गई थी।

अवैध तरीके से भारत लाते थे सुपारी

जांच से पता चला कि सूखे सुपारी कथित तौर पर बिना वैध कस्टम्स क्लीयरेंस के मिजोरम के जोखाउथार और चम्फाई रास्तों से म्यांमार से भारत लाए गए थे। ED के अनुसार, तस्करी किए गए सुपारी को टियाउ नदी के रास्ते भारतीय सीमा तक पहुंचाया जाता था, जहां स्थानीय लोग उन्हें लेते थे। इसके बाद इस खेप को असम सीमा के पास वैरेंगटे भेजने से पहले चम्फाई में स्टोर किया जाता था।

337 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों का खुलासा

जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को असम के सिलचर में मौजूद कुछ व्यापारियों और वित्तीय सहयोगियों का समर्थन प्राप्त था। खेप को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर नकली प्लांटेशन सर्टिफिकेट और जाली कस्टम्स दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी पता चला कि 2021 और 2024 के बीच, सामान के परिवहन को आसान बनाने के लिए 337 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) ई-वे बिल बनाए गए थे।

2 से 15 रुपये तक दिया जाता था कमीशन

ED के अनुसार, परिवहन और अन्य लॉजिस्टिकल व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय लोगों को 2 रुपये से 15 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से कमीशन दिया जाता था। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि जब्त किए गए सामान को छुड़ाने की कोशिश में अक्सर ऐसे आयात दस्तावेज जमा किए जाते थे जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। बैंक खातों की जांच से 2013 और 2025 के बीच 970 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। ED को शक है कि ये फंड कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों से जुटाए गए हो सकते हैं। छापेमारी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, व्यावसायिक रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ज़ब्त किए गए। एजेंसी ने कहा कि इन सामग्रियों की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

ये भी पढ़ेंः...देश की सुरक्षा से समझौता नहीं...सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की...

अन्य प्रमुख खबरें