Chandipura virus: डूंगरपुर के बाद सिरोही में भी चांदीपुरा वायरस से बच्ची की मौत, राजस्थान-गुजरात में अलर्ट

खबर सार :-

डूंगरपुर के बाद सिरोही में भी चांदीपुरा वायरस से बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। राजस्थान और गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। जानिए वायरस के लक्षण, कारण और बचाव के उपाय।
Chandipura virus: डूंगरपुर के बाद सिरोही में भी चांदीपुरा वायरस से बच्ची की मौत, राजस्थान-गुजरात में अलर्ट

खबर विस्तार : -

जयपुरः राजस्थान में चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus) को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। डूंगरपुर जिले में जुलाई के तीसरे सप्ताह में एक बच्ची की मौत के बाद अब सिरोही जिले में भी एक मासूम की जान इस संक्रमण के कारण चली गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि राजस्थान और गुजरात के आदिवासी बहुल सीमावर्ती इलाकों में ही इस वायरस के अधिक मामले सामने आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि दोनों राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन क्षेत्रों में संक्रमण के मामले अधिक क्यों मिल रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग फिलहाल संक्रमण की रोकथाम, सर्वे और निगरानी पर विशेष जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान कीटों की संख्या बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

डूंगरपुर में सामने आया था 2026 का पहला मामला

राजस्थान में वर्ष 2026 का पहला चांदीपुरा वायरस संक्रमण का मामला डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा उपखंड के रतनपुरा गांव में सामने आया था। जानकारी के अनुसार बच्ची को 12 जुलाई को तेज बुखार, उल्टी और अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर गुजरात के हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 जुलाई को बच्ची के नमूने जांच के लिए भेजे गए, लेकिन उसी दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजन शव लेकर गांव लौट आए, जबकि उस समय स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को इस घटना की जानकारी नहीं मिल सकी।

बाद में हिम्मतनगर अस्पताल की ओर से जांच रिपोर्ट गुजरात स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई। चूंकि मरीज राजस्थान के डूंगरपुर जिले की निवासी थी, इसलिए गुजरात सरकार ने यह सूचना राजस्थान स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई। 18 जुलाई को सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने रतनपुरा गांव में विशेष स्वास्थ्य सर्वे शुरू किया। घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गई, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण नहीं मिले। इसके बावजूद गांव में लगातार निगरानी रखी जा रही है।

सिरोही में भी सामने आया मौत का मामला

डूंगरपुर के बाद अब सिरोही जिले में भी एक बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। इस घटना के बाद चिकित्सा विभाग ने आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। संदिग्ध मरीजों की पहचान, स्वास्थ्य जांच और लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान और तत्काल इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। इसलिए बुखार या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की सलाह दी जा रही है।

गुजरात में डेढ़ महीने में 12 बच्चों की मौत

गुजरात में पिछले करीब डेढ़ महीने के दौरान 12 बच्चों की मौत हुई है। इनमें से तीन बच्चों में चांदीपुरा वायरस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि नौ अन्य मामलों में भी इसी वायरस की आशंका जताई गई है। गुजरात के गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली, पंचमहल और दाहोद जिलों में संक्रमण के मामले सामने आए हैं। राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही, उदयपुर और जालौर जिले इन क्षेत्रों से सीधे जुड़े हुए हैं। दोनों राज्यों के बीच लोगों की लगातार आवाजाही होने के कारण स्वास्थ्य विभाग सीमा क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरत रहा है।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस एक वायरल संक्रमण है, जिसे जूनोटिक वायरस माना जाता है। इसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका संक्रमण मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के माध्यम से फैलने की आशंका है। इसके अलावा टिक्स और कुछ परिस्थितियों में मच्छरों की भी भूमिका की जांच की जा रही है। यह वायरस विशेष रूप से बच्चों को अधिक प्रभावित करता है और कई मामलों में मस्तिष्क पर गंभीर असर डाल सकता है।

चांदीपुरा वायरस के प्रमुख लक्षण

संक्रमण की शुरुआत सामान्य वायरल बुखार जैसी हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में यह तेजी से गंभीर रूप ले लेता है।

* तेज बुखार
* सिरदर्द
* अत्यधिक थकान
* शरीर और मांसपेशियों में दर्द
* उल्टी
* दौरे (आक्षेप)
* सांस लेने में कठिनाई
* लगातार खांसी
* निमोनिया


संक्रमण से बचाव के उपाय

चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए फिलहाल कोई विशेष वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। यदि बच्चे में तेज बुखार के साथ दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।


विशेषज्ञ निम्न सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं—

* नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं।
* घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
* मच्छरदानी और कीटरोधी क्रीम का उपयोग करें।
* बच्चों को पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
* पशुओं और जंगली जीवों के संपर्क में सावधानी बरतें।
* घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
* तेज बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर

राजस्थान और गुजरात के स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी कर रहे हैं। सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सर्वे, जागरूकता अभियान, संदिग्ध मरीजों की जांच और मेडिकल टीमों की तैनाती की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर इलाज और सतर्कता से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। फिलहाल दोनों राज्यों में स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा है।


FAQ

चांदीपुरा वायरस क्या है?

चांदीपुरा वायरस एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है।

चांदीपुरा वायरस कैसे फैलता है?

विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के जरिए फैलता है। इसके अलावा टिक्स और कुछ परिस्थितियों में मच्छरों की भूमिका पर भी शोध जारी है।

चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, शरीर में दर्द, थकान, दौरे (आक्षेप), बेहोशी और सांस लेने में तकलीफ इसके प्रमुख लक्षण हैं।

राजस्थान में चांदीपुरा वायरस के मामले कहां सामने आए हैं?

वर्ष 2026 में राजस्थान में डूंगरपुर और सिरोही जिलों में चांदीपुरा वायरस से बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं।

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