कैबिनेट ने असम के गुवाहाटी-तेजपुर 4-लेन एक्सप्रेस कॉरिडोर को दी मंजूरी, परियोजना से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

खबर सार :-

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम में एनएच-15 पर 135.87 किमी लंबे गुवाहाटी-तेजपुर चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर को मंजूरी दी। 8,970 करोड़ रुपये की इस परियोजना से यात्रा समय कम होगा और कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
कैबिनेट ने गुवाहाटी-तेजपुर 4-लेन कॉरिडोर को मंजूरी, 8,970 करोड़ की परियोजना

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने गुरुवार को असम के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना को मंजूरी दे दी। समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग-15 (एनएच-15) पर 135.871 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी-तेजपुर चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। करीब 8,970.20 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना, यात्रा का समय कम करना और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देना है।

इस फैसले की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना असम में कनेक्टिविटी और विकास को नई दिशा देगी तथा सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार लाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताई परियोजना की खासियत

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में कहा कि कैबिनेट द्वारा स्वीकृत यह चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत कई बाईपास बनाए जाएंगे, जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना में तेजपुर में आपातकालीन विमान लैंडिंग सुविधा, कई पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। इससे असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच निर्बाध सड़क संपर्क मजबूत होगा।

8,970 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा कॉरिडोर

सरकार के अनुसार, यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग (मूल) योजना के तहत निर्मित-संचालन-स्थानांतरण (BOT-Toll) मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसकी कुल अनुमानित लागत 8,970.20 करोड़ रुपये है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत में आधुनिक परिवहन अवसंरचना विकसित कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है।

तेजपुर बाईपास पर बनेगी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा

परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का निर्माण है। इस सुविधा को भारतीय वायु सेना के समन्वय से अंतिम रूप दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर वायुसेना के लड़ाकू और अन्य विमान इस सड़क पर सुरक्षित लैंडिंग कर सकेंगे। रणनीतिक दृष्टि से यह सुविधा उत्तर-पूर्व क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पांच बड़े बाईपास से कम होगा ट्रैफिक

परियोजना के तहत कुल 58.7 किलोमीटर लंबे पांच प्रमुख बाईपास बनाए जाएंगे। ये बाईपास बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, ढेकियाजुली और तेजपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद करेंगे। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर) पर भी यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।

कई पुल, फ्लाईओवर और अंडरपास होंगे तैयार

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत आधुनिक सड़क अवसंरचना विकसित की जाएगी। इसमें 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास,  तेजपुर बाईपास पर एक विशेष हाथी अंडरपास लगभग 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। हाथी अंडरपास का निर्माण वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से किया जाएगा।

आधा होगा यात्रा समय, बढ़ेगी सड़क सुरक्षा

सरकार का कहना है कि इस एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के निर्माण के बाद वाहनों की औसत गति लगभग दोगुनी हो जाएगी, जिससे गुवाहाटी और तेजपुर के बीच यात्रा समय लगभग आधा रह जाएगा। इसके अलावा सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, ईंधन की खपत कम होगी और वाहनों के परिचालन खर्च में भी कमी आएगी। बेहतर सड़क संपर्क से माल परिवहन अधिक तेज और किफायती होगा, जिसका लाभ उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगा।

पर्यटन और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

यह परियोजना असम और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक केंद्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ेगी। इसके जरिए आठ पीएम गति शक्ति आर्थिक केंद्रों (औद्योगिक पार्कों) को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही यह परियोजना दो आकांक्षी जिलों—दरांग और उदलगुरी—को बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी।

रेलवे, एयरपोर्ट और जलमार्ग से बेहतर होगा संपर्क

सरकार के अनुसार, इस कॉरिडोर से सात प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इनमें तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और दो अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनल शामिल हैं। इससे यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई की गति भी बढ़ेगी और उत्तर-पूर्व भारत में व्यापारिक गतिविधियों को नई मजबूती मिलेगी।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार

सरकार का मानना है कि गुवाहाटी-तेजपुर एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ने, रोजगार के नए अवसर पैदा होने और पर्यटन, उद्योग तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह परियोजना असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच आर्थिक और सामाजिक संपर्क को भी नई गति प्रदान करेगी।

FAQ

1. गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर परियोजना को किसने मंजूरी दी है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने इस परियोजना को मंजूरी दी है।

2. इस परियोजना की कुल लागत कितनी है?
गुवाहाटी-तेजपुर चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर परियोजना की अनुमानित लागत 8,970.20 करोड़ रुपये है।

3. गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर की लंबाई कितनी होगी?
यह कॉरिडोर 135.871 किलोमीटर लंबा होगा और राष्ट्रीय राजमार्ग-15 (NH-15) पर विकसित किया जाएगा।

4. इस परियोजना से लोगों को क्या लाभ मिलेगा?
परियोजना से यात्रा समय लगभग आधा हो जाएगा, सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, ट्रैफिक जाम कम होगा, ईंधन की बचत होगी और असम व अरुणाचल प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

5. इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर, 46 अंडरपास, 210 किलोमीटर सर्विस रोड, पांच बाईपास और तेजपुर में 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन विमान लैंडिंग सुविधा (Emergency Landing Facility) का निर्माण शामिल है।

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