ट्रैफिक problem से बचा सकती है क्वांटम तकनीक, UP एसआईएफएस में रखी तकनीकी प्रस्तुति

खबर सार :-

किसी भी स्थान पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम लग जाता है। और भी कई कारण जाम लगने के हो सकते हैं। इनमें पुलिस वाहन, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस भी फंस जाती हैं। इस पर चिंता जताते हुए युवा वैज्ञानिकों ने जल्द ही हल निकालने का प्रयास शुरू कर दिया है।
quantum computing की दिशा में बढ़ रहे युवा, LUCKNOW में ट्रैफिक से निपटने के सुझाव दिए

खबर विस्तार : -

लखनऊ, प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रोत्साहन से स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही हैं। इन्हीं कोशिशें के बीच उच्च स्तरीय शिक्षा में तकनीकी सुधार की गुंजाइश वाले रास्ते तलाशे जा रहे हैं। लखनऊ शहर के साथ ही कई और प्रमुख बड़े शहरों में ट्रैफिक की समस्याएं अक्सर सुनाई पड़ जाती हैं।

इन्हीं समस्याओं में वाहनों के टकराने एवं पशुओं के सड़क पर आ जाने से एक्सीडेंट शामिल हैं। ऐसी कई परेशानियों से निपटने के लिए तकनीकी गुंजाइश की तलाश की जा रही है। इनके लिए अगर कुछ मददगार हो सकती है तो वह फॉरेंसिक शिक्षा ही है। इसके लिए युवा निरंतर प्रयत्न भी कर रहे हैं। आने वाले समय में हो सकता है कि एकचिप से इसका समाधान निकाल लिया जाए। इन बच्चों के साथ बड़ों का बडा योगदान है। इसलिए उम्मीदें काफी हैं। 

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सेमिनार में अक्सर रोड जाम को लेकर जताई गई चिंता

उत्तर प्रदेश की तकनीक आधारित फॉरेंसिक शिक्षा को योगी सरकार लगातार बढ़ावा दे रही है। पिछले दिनों आयोजित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) लखनऊ में बुधवार को क्वांटम टेक्नोलॉजी पर स्टेज प्रेजेंटेशन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही तकनीकी आधारित उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए। इनमें संस्थान के लॉ, बीटेक और एमटेक के छात्र-छात्राओं ने भविष्य में आने वाली कई बड़ी परेशानियों का काल्पनिक उदाहरण प्रस्तुत किया।

इनसे निपटने के लिए उनके पास कुछ योजनाएं हैं, जिनके बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर कई विशेषज्ञ भी थे, जिन्होंने अपने ज्ञान से उनके सवालों का उत्तर दिया। यहां पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी रही। ‘डिस्कवरी एवं क्वांटम कंप्यूटिंग के माध्यम से यातायात समस्या का समाधान’ विषय पर विषय विशेषज्ञ डॉ. पवन शर्मा और हेराल्ड डी कोस्टा के समक्ष प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। 

पर्यावरण की रक्षा भी करेगा युवाओं का ज्ञान और विज्ञान

पर्यावरण के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसमें ऊर्जा कार्बन ऑक्सीजन और पानी के योगदान पर भी अपने-अपने विचार दिए गए। वाहनों का आइडल टाइम कम करके सीओट,ू उत्सर्जन और ईंधन की खपत घटाने तथा ग्रीन मोबिलिटी पर सुझाव दिए गए, जबकि किसी भी तरह से सुरक्षा और रियल-टाइम स्पीड के लिए एन्क्रिप्शन और नियमों के साथ डेटा सुरक्षित रखने में कैसे मदद मिल सकती है? ऐसी परिस्थिति में कुछ ही पलों में दूसरे रूट पर निकल जाना कैसे आसान हो सकता है? अपने-अपने तार्किक तथ्यों के जरिए इनको स्पष्ट किया।

अक्सर देखा जाता है की लखनऊ जैसे शहर में कई स्थानों पर जाम के कारण एंबुलेंस भी फंस जाती हैं। ऐसे अवसर भी आए हैं, जबकि तत्काल मौके पर जाने के लिए निकली फायर ब्रिगेड की दमकल और पुलिस की गाड़ी भी आगे नहीं बढ़ पाती है। यहां तक की मरीज एंबुलेंस में पड़ा रहता है और एंबुलेंस जाम में फंसी रह जाती है।

ऐसे हालात है, जिनसे निपटने के पुख्ता इंतजाम कहीं किसी भी शहर में नहीं हो पाए हैं। इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम के जरिए ऐसे हालातो से निपटने के सुझाव दिए गए। तकनीकी फॉरेंसिक विषय पर आधारित कार्यक्रम में बताया गया कि हम ऐसे ही मौके पर रूट तैयार कर सकते हैं और बता सकते हैं कि किस मार्ग का इस्तेमाल किया जाए। 

किसी मार्ग को अचानक खाली करने की व्यवस्था देगी तकनीक

किसी मार्ग को अचानक खाली किया जाए, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों पर पुलिस एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ी निकाली जा सके। फॉरेंसिक व इमरजेंसी लॉजिस्टिक्स के तहत भविष्य में एंबुलेंस, पुलिस और फॉरेंसिक सेवाओं के लिए प्राथमिकता वाले ट्रैफिक रूट तैयार करने की संभावनाएं हैं। सर्वजन हिताय कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए उदाहरण पर विषय विशेषज्ञ और आईटी एक्सपर्ट (यूएसए) डॉ. पवन शर्मा ने खुशी जताते हुए कहा कि संस्थान की ओर से छात्र-छात्राओं को जो तकनीकी माहौल दिया जा रहा है, वह बेहद सराहनीय है।

लोगों के विचारों और व्याख्यानों के बाद यह बताया गया कि छात्र-छात्राओं ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया और जो तकनीकी तैयार कर रहे हैं। वह उसे मार्ग पर सटीक है जिन का समाधान वह चाहते हैं। उन्होंने कहा छात्र-छात्राओं ने टेक्नोलॉजी विषय पर अपनी अद्भुत पकड़ बनाई है। इस कार्यक्रम से पता चलता है की जो प्रेजेंटेशन रहा है उसमें दक्षता है।

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