अनूपपुरः भरियाटोला के स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र का हाल बेहाल, घुटने से अधिक पानी पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे

खबर सार :-

अनूपपुर के सरकारी स्कूल की हालत बेहद दयनीय है। दो माह से यहां पानी भरा है, लेकिन मासूमों की किसी को चिंता नहीं है। ग्रामीण तो कह रहे हैं कि जानकारी देने के बाद भी वह इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं।
अनूपपुर का यह स्कूल, सरकारी दावों की खोल रहा पोल, बरसात के आरंभ से ही भर जाता है पानी

खबर विस्तार : -

अनूपपुरः  सरकारें चाहें कितने भी दावे कर लें, लेकिन सच्चाई खुलकर सामने आ ही जाती है। एक ओर पढ़ाई में बच्चों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की बात सामने आती है तो दूसरी ओर उनके स्कूल तक पहुंचने का रास्ता ही नहीं है। ऐसे में सारे दावे खोखले साबित हो जाते हैं। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में ग्राम भरियाटोला का प्राथमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्र देखकर तो यही कहा जा सकता है। 

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स्कूल के सामने जलभराव की समस्या गंभीर है। यह बात शिक्षा अधिकारी खुद स्वीकार रहे हैं। ग्राम भरियाटोला का प्राथमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्र इस बात के साक्षी बन रहे हैं कि सरकारी स्कूलों की हालत आज भी दयनीय है। सरकार बड़ा बजट खर्च कर रही है, लेकिन मूल सुविधाएं नहीं हैं। बारिश होने के बाद विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र के मैदान में पानी बढ़ जाता है। यहां महीनों से पानी भरा हुआ है। यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को प्रतिदिन घुटने से अधिक पानी से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है, वह किन मुस्किलों से होकर गुजर रहे हैं। ग्रामीणों ने इस समस्या की जानकारी जिम्मेदारों को दी थी, लेकिन अब तक जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।

त्वचा संबंधी संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता

जब कोई बीमारी अचानक उत्पन्न होती है, तब महामारी का खतरा समझ उससे निपटने और बीमारी को नष्ट करने के इंतजाम किए जाते हैं। लेकिन स्कूल जाने वाले इन बच्चों के सामने कोई परेशानी हो तो उसे समझ पाने की स्थिति में शायद अधिकारी हों? यह गरीब परिवारों के बच्चे बारिश के पानी की निकासी नहीं होने के कारण गंदे पानी से रोज निकलते हैं। यहां के बच्चों के लिए विद्यालय पहुंचना रोज की चुनौती है, और वह इसका सामना करते हैं। हद तो यह है कि यह इसी पानी भरे मैदान में खेलने भी हैं। यह गिरते हैं, वही गीले कपड़े अपने तन पर ही सुखाते हैं। इनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दो माह से यहां पानी भरा है। इसमें सांप और बिच्छू भी हो सकते हैं। त्वचा संबंधी रोग फैलने का डर हमेशाा रहता है। सवाल यह है कि महनों की इस समस्या पर अधिकारियों का ध्यान क्यों नहीं जाता है? ग्रामीण तो कह रहे हैं कि जानकारी देने के बाद भी वह इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। 

बरसात आते ही भरने लगा था पानी

स्कूल में पानी भरने का जब कारण पूछा गया तो ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र में जलभराव नई समस्या नहीं है। बारिश शुरू होते ही मैदान में पानी जमा होने लगा था। इसके लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन उनके लिए यह परेशानी नहीं है। पानी की निकासी के लिए नाली तो दूर वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं की गई।

 दोनों स्थानों में घुटनों तक है पानी

विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण उपलब्ध करा पाएंगे? यह सवाल उठाया जा रहा है। इन महत्वपूर्ण केंद्र पर शिक्षक आते हैं? इस सवाल पर तो ग्रामीण भी चुप रह जाते हैं। स्कूल परिसर में महीनों से पानी भरा है। इन स्कूलों या आंगनबाड़ी केंद्रों में काफी कम उम्र के बच्चे पढ़ने आते हैं। शिक्षा विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत की यह जिम्मेदारी बनती है कि इस परेशानी से बच्चों को निकालें। इनकी सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र के मैदान से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से यह मांग भी की है। उधर, सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े जिला प्रमुख संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि अगर पानी भरा है तो पहले बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बात संज्ञान में आई है मैं बीआरसी जैतहरी को भेज कर दिखवाता हूं।

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