एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने गाया वंदेमातरम, देश बना रहा रिकॉर्ड

खबर सार :-

वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में इसे उत्सव की तरह गाया जा रहा है। हर ओर रिकॉर्ड बनाए जा रहे हैं।
150 साल पूरे होने पर एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने गाया वंदेमातरम

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली : वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हुए हैं। इस उपलक्ष्य में देशभर में इसे उत्सव की तरह गाया जा रहा है। इन उत्सवों की कड़ी में पश्चिमी दिल्ली स्थित माता लीलावती सरस्वती स्कूल में विशेष गायन किया गया। यह दृश्य मनोहारी उस समय बन गया, जबकि विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक साथ इसे गाया।

इस भक्ति के गीत को लेकर दिल्ली के 225 स्कूलों में वंदे मातरम कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों ने देशभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया और निवेदन किया कि विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकगण और विद्यार्थी के अलावा बाहर की दुनिया में भी इसके प्रति निष्ठा रखें। 

दिल्ली और गुजरात में मनाया गायन उत्सव

वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के साथ ही पश्चिमी दिल्ली स्थित माता लीलावती सरस्वती स्कूल में भी वंदेमातरम को लेकर ही एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विद्या भारती के अध्यक्ष सुखराज सेतिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रबुद्ध जनों ने इस गीत पर अपने अपने विचार भी दिए।

सुखराज सेतिया ने वंदे मातरम के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके इतिहास और राष्ट्र के लिए वंदेमातरम से रिश्ते बताए। विद्या भारती के अध्यक्ष सुखराज सेतिया ने कहा कि जीवन में यदि कोई कठिनाई आए, तब उन वीरों को याद कर लेना, जिन्होंने हंसते-हंसते मतवाले रूप में भारत-माता को अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह वह गीत है, जिसे शहीदों ने गाया। आज देशभक्त गा रहे हैं। यह केवल गीत न समझें, इसे जीवन में उतारने के लिए आत्म बल मानें। जब हम वंदे मातरम गाएं, तो केवल शब्द मात्र ही न गाएं।

वंदे मातरम हम इस प्रकार गाएं कि सुनने वाले लोगों को हमारी अंदर की राष्ट्रीय चेतना महसूस हो। यह गीत आज दिल्ली के बाहर गुजरात के कच्छ में भी गाया गया। इसको गाने के लिए भुज में देशभक्ति के रंग में रंगे एक भव्य सामूहिक वंदे मातरम गायन का आयोजन किया गया। पंक्तियों में जगह कम पड़ गई। रंग विरंगे परिधानों मे बच्चे वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए खड़े थे।

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मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में गायन किया

इस उपलक्ष्य में विद्या भारती, गुजरात प्रदेश और कच्छ कल्याण संघ से संबद्ध विभिन्न शिक्षण संस्थानों द्वारा नमामि भारतम कार्यक्रम के अंतर्गत सामूहिक वंदे मातरम गायन का आयोजन किया गया। यहां पर करीब 1,100 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन उनके लिए प्रेरणा बना जो एक साथ वंदे मातरम गायन में नहीं पहुंच पाए। साथ ही देशभक्ति की भावना का प्रदर्शन करने वाला यह गीत उनके लिए सीख बना जो गाना नहीं चाहते।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन कच्छ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कनिष्क शाह ने किया था। भुज नगर पालिका के महापौर शीतलभाई शाह अतिथि के रूप में यहां उपस्थित हुए थे। वह कोई भी रहा हो, सब ने आज इस समारोह में वंदेमातरम गाया। समारोह में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, अभिभावक और विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग उपस्थित थे। यहां पर एक गीत, एक भावना और एक भारत संदेश की झलक देखी गई। इसी के साथ आयोजित इस सामूहिक गायन कार्यक्रम में 1,100 से अधिक लोगों ने एक साथ वंदे मातरम गाया।

बच्चों ने वंदेमातरम गाया और बड़ों ने संदेश दिया

इस मौके पर व्यवस्थापक विद्याभारती, वनराजसिंह जडेजा ने कहा कि  बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना की थी। मध्य प्रदेश के रायसेन में भी नगर के रामलीला मैदान स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में विद्या भारती मध्य भारत प्रांत के आह्वान पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सामूहिक गायन का एक ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मुख्य वक्ता अमित त्रिपाठी ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत करना है। यहां उप निरीक्षक श्रद्धा उइके, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मंजू धीरेंद्र सिंह कुशवाहा मौजूद रहे। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के नीमच के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में भी करीब 3 हजार से अधिक लोगों ने एक साथ ‘वंदे मातरम’ का गायन किया। इस अवसर पर नगर के गणमान्य नागरिक, धार्मिक प्रतिनिधि, विद्यालय के छात्र-छात्राएं, आचार्य, दीदी और अभिभावक उपस्थित रहे। 

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