SEBI News Update: सेबी ने एल्गोरिथम ट्रेडिंग को दी नई परिभाषा, पीसीएम नियमों में बदलाव
खबर सार :-
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने एल्गोरिथम ट्रेडिंग की स्पष्ट परिभाषा तय की और प्रोफेशनल क्लियरिंग मेंबर से जुड़े नियमों में बदलाव प्रस्तावित किए। जानिए क्या हैं ये नए बदलाव...
खबर विस्तार : -
मुंबई: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पूंजी बाजार के पारदर्शिता और संरचना को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बुधवार को एक महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव जारी किया है। इस प्रस्ताव में पहली बार एल्गोरिथम ट्रेडिंग (Algorithmic Trading) की स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, साथ ही ब्रोकर्स और क्लियरिंग मेंबर्स से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं।
सेबी ने एल्गोरिथम ट्रेडिंग को ऐसे किसी भी ऑर्डर के रूप में परिभाषित करने का प्रस्ताव रखा है जो स्वचालित निष्पादन तर्क (Automated Execution Logic) का उपयोग करके उत्पन्न या डाला गया हो। पहले एल्गो ट्रेडिंग को लेकर दिशानिर्देश तो जारी किए गए थे, लेकिन इसकी कोई तयशुदा परिभाषा नहीं थी। यह प्रस्ताव एक कार्य समूह द्वारा तैयार किया गया है जिसमें एक्सचेंज, ब्रोकर, कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद और निवेशक संघों के प्रतिनिधि शामिल थे।
प्रोफेशनल क्लियरिंग मेंबर (PCM)
सेबी का कहना है कि यह कदम नियामकीय भाषा को स्पष्ट करने, पुराने नियमों की विसंगतियों को खत्म करने और मौजूदा बाजार व्यवहार को विनियमन में शामिल करने की दिशा में उठाया गया है। इस मसौदे को सेबी की मध्यस्थ सलाहकार समिति में चर्चा के बाद सार्वजनिक राय के लिए जारी किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, 'प्रोफेशनल क्लियरिंग मेंबर (PCM)' की परिभाषा में भी स्पष्टीकरण जोड़ा गया है। अभी PCM को उस एक्सचेंज में ट्रेडिंग राइट्स नहीं मिलते जहां वे पंजीकृत होते हैं, लेकिन यह बात भ्रम की स्थिति पैदा कर रही थी। सेबी ने साफ किया कि PCM निवेशक के तौर पर ट्रेडिंग राइट्स रख सकते हैं, परंतु वे एक्सचेंज के ट्रेडिंग सदस्य नहीं होंगे।
क्लियरिंग कॉरपोरेशन में क्लियरिंग और निपटान का अधिकार
सेबी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा विनियमन 2(1)(AE) के तहत क्लियरिंग मेंबर वह व्यक्ति होता है जिसे किसी मान्यता प्राप्त क्लियरिंग कॉरपोरेशन में क्लियरिंग और निपटान का अधिकार होता है। साथ ही, कमोडिटी डेरिवेटिव एक्सचेंज में उसे सेबी द्वारा निर्दिष्ट तिथि से मान्यता प्राप्त क्लियरिंग कॉरपोरेशन का सदस्य बनना जरूरी होगा। सेबी ने जनता से इन प्रस्तावों पर 3 सितंबर, 2025 तक टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद संभावित रूप से इन बदलावों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जो भविष्य में पूंजी बाजार की कार्यप्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाएंगे।
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