RBI की बड़ी कार्रवाई: मुंबई के सर्वोदय Co-operative Bank का लाइसेंस रद्द, जमाकर्ताओं में बढ़ी चिंता
खबर सार :-
सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द होना देश के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। आरबीआई अब कमजोर वित्तीय स्थिति वाले बैंकों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई कर रहा है ताकि जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित रहे। हालांकि अधिकांश ग्राहकों को डीआईसीजीसी के जरिए राहत मिलेगी, लेकिन यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत प्रशासन और पारदर्शिता की जरूरत को फिर सामने लाता है।
खबर विस्तार : -
RBI cancel Sarvodaya Co-operative Bank License : मुंबई स्थित सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने यह फैसला बैंक की लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति, पूंजी की कमी और भविष्य में आय की कमजोर संभावनाओं को देखते हुए लिया। आरबीआई के निर्देश के अनुसार यह आदेश 12 मई को कारोबार बंद होने के बाद से प्रभावी हो गया। इस फैसले के बाद बैंक अब किसी भी प्रकार की बैंकिंग सेवाएं नहीं दे सकेगा।
आरबीआई ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के कई जरूरी प्रावधानों का पालन करने में असफल रहा। केंद्रीय बैंक के मुताबिक मौजूदा हालात में बैंक का संचालन जारी रखना जमाकर्ताओं के हित में नहीं था। इसी कारण लाइसेंस रद्द करने जैसा कड़ा कदम उठाया गया।
अब बैंक नहीं कर सकेगा कोई वित्तीय लेन-देन
लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक को तत्काल प्रभाव से सभी बैंकिंग गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया गया है। इसका मतलब है कि अब बैंक न तो नए जमा स्वीकार कर सकेगा और न ही ग्राहकों को भुगतान या निकासी की सुविधा दे पाएगा। बैंक की शाखाओं में नियमित बैंकिंग सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को बैंक को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही एक लिक्विडेटर नियुक्त किया जाएगा, जो बैंक की संपत्तियों और देनदारियों का आकलन कर उनका निपटान करेगा। यह प्रक्रिया बैंक के वित्तीय मामलों को व्यवस्थित तरीके से समाप्त करने के लिए अपनाई जाती है।
जमाकर्ताओं के लिए क्या है राहत?
हालांकि बैंक का लाइसेंस रद्द होने से ग्राहकों में चिंता बढ़ी है, लेकिन आरबीआई ने जमाकर्ताओं को राहत देने वाली जानकारी भी साझा की है। केंद्रीय बैंक के अनुसार जिन ग्राहकों की जमा राशि 5 लाख रुपए तक है, उन्हें डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) के तहत बीमा सुरक्षा मिलेगी। आरबीआई ने बताया कि बैंक के लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता ऐसे हैं, जिन्हें उनकी पूरी जमा राशि वापस मिल जाएगी। यह भुगतान डीआईसीजीसी के जरिए किया जाएगा। 31 मार्च 2026 तक डीआईसीजीसी द्वारा करीब 26.72 करोड़ रुपए का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इससे छोटे जमाकर्ताओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
सहकारी बैंकों पर लगातार बढ़ रही सख्ती
पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई वित्तीय रूप से कमजोर शहरी सहकारी बैंकों के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपना रहा है। रिजर्व बैंक का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई छोटे सहकारी बैंक पूंजी की कमी, खराब प्रबंधन और बढ़ते एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में आरबीआई उन संस्थानों पर कार्रवाई कर रहा है जो नियामकीय मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिन खाताधारकों की जमा राशि बीमित सीमा के भीतर है, उन्हें डीआईसीजीसी से भुगतान मिल जाएगा। ग्राहकों को बैंक और संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों पर नजर बनाए रखनी चाहिए। इसके अलावा ग्राहकों को अपने दस्तावेज, पासबुक और खाते से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है ताकि बीमा दावा प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश या जमा करते समय ग्राहकों को बैंक की वित्तीय स्थिति और विश्वसनीयता की जांच जरूर करनी चाहिए।
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