SBI Research Report: वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की विकास दर वित्त वर्ष 2026-27 में 6.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। वहीं, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज कर सकती है। यह संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष ने कहा कि कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों ने ग्रामीण उपभोग को मजबूत बनाए रखा है। इसके साथ ही सरकारी राजकोषीय प्रोत्साहन और त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग के कारण शहरी खपत में भी लगातार सुधार देखा गया है। उन्होंने कहा कि पिछले फेस्टिव सीजन से शहरी बाजारों में उपभोक्ता मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका असर खुदरा कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। मजबूत घरेलू खपत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी है।
एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) के बैंक ऋण में वित्त वर्ष 2026 के दौरान 16.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह वित्त वर्ष 2025 के 11 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल ऋण वृद्धि 29.5 लाख करोड़ रुपए रही। इसमें पहली छमाही में केवल 5 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ, जबकि दूसरी छमाही में यह बढ़कर 24.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की ओर से जीएसटी और अन्य उपभोग प्रोत्साहन उपायों के कारण मांग में तेजी आई, जिससे ऋण वितरण में बड़ा उछाल देखने को मिला। यही वजह है कि 30 अप्रैल 2026 तक भी बैंक ऋण वृद्धि 16 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में ऋण वृद्धि मजबूत बनी रह सकती है, लेकिन दूसरी छमाही में उच्च आधार प्रभाव के कारण इसमें कुछ नरमी देखने को मिल सकती है। पूरे वर्ष के लिए बैंक ऋण वृद्धि 13 से 14 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत घरेलू मांग और निवेश गतिविधियां आर्थिक वृद्धि को स्थिर बनाए रखेंगी। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां भी भारतीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देंगी।
एसबीआई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक संकट, खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि होती है तो इसका सीधा असर भारत के चालू खाता घाटे, महंगाई और जीडीपी पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि से चालू खाता घाटा 0.35 प्रतिशत बढ़ सकता है। साथ ही मुद्रास्फीति में 0.35 से 0.40 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है, जबकि जीडीपी पर 0.20 से 0.25 प्रतिशत तक का प्रभाव पड़ सकता है।
दुनियाभर में आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध जैसे हालात और सप्लाई चेन संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखा रही है। मजबूत घरेलू मांग, बैंकिंग सेक्टर में बढ़ता विश्वास और सरकारी प्रोत्साहन नीतियां देश की आर्थिक वृद्धि को नई दिशा दे रही हैं।
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