वैश्विक तनाव का असर: लाल निशान में खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 76 हजार के नीचे फिसला, निवेशकों की चिंता बढ़ी

खबर सार :-
वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आईटी शेयरों में बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। निवेशकों में फिलहाल सतर्कता बनी हुई है और विदेशी संकेत बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

वैश्विक तनाव का असर: लाल निशान में खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 76 हजार के नीचे फिसला, निवेशकों की चिंता बढ़ी
खबर विस्तार : -

Sensex Nifty Share prices update:  वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में तनाव के चलते मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। निवेशकों में सतर्कता का माहौल रहा और आईटी तथा सर्विस सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली।

भारतीय शेयर बाजार के अनुसार, आज सुबह 9:19 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 366 अंक यानी 0.48 प्रतिशत टूटकर 75,648 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 91 अंक यानी 0.38 प्रतिशत गिरकर 23,724 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत से ही कमजोरी का माहौल बना रहा और अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स दबाव में दिखाई दिए।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। इसी कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी

भारतीय शेयर बाजार में आज शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज इंडेक्स सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे दिग्गज शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, आईटीसी, एलएंडटी और टाइटन जैसे बड़े शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर कुछ सेक्टरों में मजबूती भी देखने को मिली। निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी मेटल, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी पीएसई हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, टाटा स्टील, एनटीपीसी और एसबीआई के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।

लार्जकैप और मिडकैप शेयरों में भी गिरावट

बाजार की कमजोरी केवल लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में दिखाई दिए। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 178 अंक यानी 0.96 प्रतिशत गिरकर 18,347 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 472 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60,785 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों का रुझान कमजोर बना हुआ है।

एशियाई बाजारों का हाल

एशियाई बाजारों की बात करें तो वहां मिला-जुला रुख देखने को मिला। टोक्यो, हांगकांग और बैंकॉक के बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई, सोल और जकार्ता के बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार सोमवार को हल्की बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स 0.19 प्रतिशत और नैस्डैक 0.10 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ था।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ी चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 0.92 प्रतिशत की बढ़त के साथ 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.08 प्रतिशत मजबूत होकर 99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। तेल कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने और आयात बिल पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है।

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