US-Iran Tension Impact: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बाजार लाल निशान में खुला और शुरुआती घंटों में निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की। कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में दबाव बना रहा।
बीएसई सेंसेक्स 212.58 अंक यानी 0.27 प्रतिशत गिरकर 77,631.94 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 93 अंक यानी 0.38 प्रतिशत टूटकर 24,233.65 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में ऑटो, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई।
बाजार में बिकवाली का सबसे ज्यादा असर ऑटो और बैंकिंग सेक्टर पर दिखाई दिया। निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण विदेशी निवेशकों का रुझान फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। इसका सीधा असर बैंकिंग और ऑटो कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयर शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे। वहीं टाटा स्टील और अल्ट्राटेक सीमेंट में भी कमजोरी दर्ज की गई।
जहां एक ओर बाजार में गिरावट का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर आईटी और फार्मा सेक्टर ने कुछ राहत देने का काम किया। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक और टीसीएस जैसे आईटी शेयरों में खरीदारी देखी गई। इसके अलावा सन फार्मा और भारती एयरटेल भी हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक आईटी और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख कर रहे हैं। निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी फार्मा और निफ्टी आईटी इंडेक्स में मजबूती दर्ज की गई, जिसने बाजार की बड़ी गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा।
व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 76 अंक गिरकर 61,926.35 पर पहुंच गया। हालांकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 18,701 पर कारोबार करता दिखा। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की खरीदारी अभी भी छोटे शेयरों में बनी हुई है, जिसके कारण स्मॉलकैप इंडेक्स में ज्यादा गिरावट नहीं आई।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। ज्यादातर एशियाई बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और जकार्ता के बाजार लाल निशान में कारोबार करते दिखे। केवल बैंकॉक बाजार में हल्की बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स इंडेक्स में 0.63 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.13 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
जानकारों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर महंगाई, कंपनियों की लागत और निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है। यही कारण है कि बाजार फिलहाल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक तनाव के बावजूद कुछ बाजार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों के बाजारों में इस साल मजबूत तेजी देखने को मिली है। एआई आधारित टेक कंपनियों ने इन बाजारों को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है।
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