ADB Report 2026: वैश्विक वैल्यू चेन की बदली तस्वीर, बढ़े रोजगार के अवसर, कम हुई गरीबी
खबर सार :-
एशियाई विकास नीति रिपोर्ट 2026 से पता चलता है कि वैश्विक उत्पादन के विभिन्न चरणों में बढ़ते विशेषज्ञता के कारण, एशिया और प्रशांत क्षेत्र ने पिछले 25 वर्षों में आर्थिक विकास हासिल किया है, रोज़गार बढ़ाया है और गरीबी कम की है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः एशिया और प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को लेकर Asian Development Bank (ABD) ने अपनी नवीनतम ‘एशियन डेवलपमेंट पॉलिसी रिपोर्ट 2026’ में महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और तेजी से विकसित हो रही तकनीकें वैश्विक वैल्यू चेन (Global Value Chains - GVCs) के स्वरूप को तेजी से बदल रही हैं।
अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने दी चेतावनी
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 25 वर्षों में उत्पादन के विभिन्न चरणों में विशेषज्ञता विकसित करने से एशिया-प्रशांत क्षेत्र ने उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति हासिल की है। इस प्रक्रिया ने न केवल क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति दी है, बल्कि रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन में भी अहम योगदान दिया है। वर्तमान में यह क्षेत्र वैश्विक वैल्यू चेन व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रखता है, जो इसकी बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाता है।
एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क के अनुसार, बढ़ता भू-आर्थिक विभाजन (Geo-economic fragmentation) कंपनियों के लिए वैश्विक नेटवर्क से लाभ उठाने की संभावनाओं को सीमित कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो इससे औद्योगिकीकरण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है, खासकर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में।
रिपोर्ट में हुआ खुलासा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विकासशील देशों की वैश्विक वैल्यू चेन में हिस्सेदारी वर्ष 2000 में 9 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि, इस वृद्धि के बावजूद क्षेत्रीय असमानताएं बनी हुई हैं। पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में मजबूत स्थिति में हैं और उच्च मूल्य संवर्धन करने में सक्षम हैं, जबकि छोटे, कम आय वाले और भौगोलिक रूप से दूरस्थ देश अब भी इस नेटवर्क से पर्याप्त रूप से नहीं जुड़ पाए हैं।
विशेषज्ञता आधारित उत्पादन ने देशों को वैश्विक बाजार से तेजी से जोड़ने में मदद की है, लेकिन इसका लाभ सभी को समान रूप से नहीं मिला है। बड़े उद्योगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इससे अधिक फायदा हुआ है, जबकि छोटे और मध्यम उद्यम (SMEs) को उच्च लागत, सीमित संसाधनों और तकनीकी बाधाओं के कारण प्रतिस्पर्धा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में वैश्विक वैल्यू चेन में बेहतर भागीदारी के लिए तीन प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है। पहली प्राथमिकता है लचीलापन और मजबूती। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में कंपनियों के लिए जोखिम प्रबंधन, त्वरित अनुकूलन क्षमता और विश्वसनीय सप्लाई चेन अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, विविध सप्लाई स्रोत और लचीले व्यवसाय मॉडल आवश्यक बताए गए हैं।
व्यापार के खुले नए रास्ते
दूसरी प्राथमिकता पर्यावरणीय स्थिरता है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यापार में अब पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य होता जा रहा है। इससे कंपनियों को स्वच्छ और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जो दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक है।
तीसरी और अंतिम प्राथमिकता समावेशी विकास की है। इसमें व्यापार लागत को कम करना, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, खुले और पारदर्शी व्यापार नियम, श्रमिकों के कौशल विकास और छोटे उद्योगों को वित्तीय व डिजिटल संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
एडीबी का मानना है कि यदि इन नीतिगत उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र न केवल वैश्विक वैल्यू चेन में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है, बल्कि संतुलित, समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
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