सोने की डिमांड बढ़ीः तीन साल में दोगुना हुआ गोल्ड इंपोर्ट, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ा दबाव
खबर सार :-
भारत में बढ़ता सोने का आयात अब आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार, चालू खाता घाटा और रुपये की स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील इसी आर्थिक दबाव को कम करने की दिशा में एक प्रयास है। यदि लोग गैर-जरूरी सोने की खरीद सीमित करते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिरता मजबूत हो सकती है।
खबर विस्तार : -
Gold Import in India: भारत में सोने के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब यही बढ़ती मांग देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की है। उनकी यह अपील ऐसे समय में आई है जब देश का सोने का आयात बिल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है और इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव बन रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन वर्षों में भारत का सोने का आयात दोगुना से भी अधिक हो गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया, जबकि वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा लगभग 35 अरब डॉलर था। इससे साफ है कि देश में सोने की खपत तेजी से बढ़ रही है।

देश में लगातार बढ़ रहा गोल्ड इंपोर्ट बिल
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। शादी-विवाह, त्योहारों और निवेश के रूप में सोने की मांग लगातार बनी रहती है। हालांकि, इसका बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है, जिसके कारण देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 45.54 अरब डॉलर का सोना आयात किया था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 58 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके बाद वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग 72 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया। यह वृद्धि सिर्फ उपभोग नहीं, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने को सुरक्षित निवेश मानने की प्रवृत्ति को भी दर्शाती है।
कच्चे तेल के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयात घटक
भारत का कुल आयात बिल वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 775 अरब डॉलर रहा। इसमें कच्चे तेल के बाद सबसे बड़ा हिस्सा सोने का रहा। देश ने अकेले सोने के आयात पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च किए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर तब, जब वैश्विक बाजार में डॉलर मजबूत हो और आयात महंगा होता जा रहा हो।
चालू खाता घाटा बढ़ने की बड़ी वजह बना सोना
सोने के बढ़ते आयात का सीधा असर देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit-CAD) पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक, वर्ष 2026 में भारत का चालू खाता घाटा 84 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो देश की जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सोने का आयात कम होता है तो सीएडी पर दबाव घटेगा और भारतीय रुपये की स्थिति भी मजबूत हो सकती है। लगातार बढ़ता आयात रुपये के अवमूल्यन को बढ़ावा देता है क्योंकि विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ जाती है।

पीएम मोदी ने क्यों की खरीद टालने की अपील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा की बचत देश के लिए बेहद आवश्यक हो गई है। उन्होंने नागरिकों से गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने और एक साल तक अनावश्यक सोने की खरीद टालने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने ईंधन बचत, घरेलू उत्पादों के उपयोग और विदेशी वस्तुओं पर कम खर्च करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका मानना है कि यदि देशवासी जिम्मेदारी दिखाते हैं तो इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
निवेश और परंपरा के बीच संतुलन की चुनौती
भारत में सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि निवेश के अन्य विकल्पों की ओर लोगों को आकर्षित करना जरूरी है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। सरकार पहले भी गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड मोनेटाइजेशन जैसी योजनाएं ला चुकी है, लेकिन लोगों की पारंपरिक सोच के कारण उनका असर सीमित रहा।
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