62,500 करोड़ की नई स्कीम से भारत बनेगा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर, निर्यात और कारोबार को मिलेगा बड़ा बूस्ट
खबर सार :-
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे उत्पादन, निर्यात, रोजगार और निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना है। घरेलू ब्रांड्स, आरएंडडी और लोकल सप्लाई चेन को प्रोत्साहन मिलने से भारत वैश्विक मोबाइल निर्माण और निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा।
खबर विस्तार : -
India mobile manufacturing: भारत सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को 62,500 करोड़ रुपए के बजट के साथ मंजूरी दे दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग एवं निर्यात केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि यह योजना घरेलू उत्पादन, रोजगार, निवेश और भारतीय मोबाइल ब्रांड्स के विकास को नई गति देगी।
भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग ने बदली वैश्विक तस्वीर
पिछले एक दशक में भारत ने मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। सरकार के 'मेक इन इंडिया' अभियान और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) जैसी योजनाओं के कारण देश आज वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। वर्तमान में भारत में इस्तेमाल होने वाले लगभग 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन देश के भीतर ही तैयार किए जा रहे हैं। इससे आयात पर निर्भरता कम हुई है और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित हुआ है।
नई स्कीम से उत्पादन और निर्यात को मिलेगा नया आधार
एमपीएमएस के तहत भारत में बने मोबाइल फोन की योग्य बिक्री पर कंपनियों को 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक इंसेंटिव मिलेगा। इसके अलावा यदि कंपनियां मोबाइल के प्रमुख पार्ट्स और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग बढ़ाती हैं तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं, भारतीय ब्रांड्स को प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) में निवेश के लिए योग्य बिक्री पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव मिलेगा। इससे केवल असेंबली ही नहीं बल्कि डिजाइन, तकनीक और इनोवेशन आधारित उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
मोबाइल निर्यात में भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत से मोबाइल फोन का निर्यात लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। सरकार के अनुसार वर्ष 2025 में स्मार्टफोन देश की सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनकर उभरे हैं। उन्होंने डीजल ईंधन और कटे हुए हीरों जैसी पारंपरिक निर्यात श्रेणियों को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने वाला बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। नई योजना के तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 39 लाख करोड़ रुपए के मोबाइल फोन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिससे निर्यात में और तेज वृद्धि की उम्मीद है।
बिजनेस और निवेश के लिए खुलेंगे नए अवसर
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में तेजी आने से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, कंपोनेंट निर्माण, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और ई-कॉमर्स जैसे कई क्षेत्रों में नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे। विदेशी कंपनियों के साथ-साथ घरेलू उद्योगों को भी निवेश बढ़ाने का अवसर मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से करीब 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, जबकि अप्रत्यक्ष रोजगार की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी नई मांग और उत्पादन का लाभ मिलेगा।
पीएलआई के बाद अगला बड़ा कदम
नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम उस पीएलआई योजना का स्थान लेगी, जिसका कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो चुका है। पीएलआई स्कीम ने भारत को वैश्विक मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब एमपीएमएस के जरिए सरकार केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि घरेलू वैल्यू एडिशन, तकनीकी क्षमता, अनुसंधान और भारतीय ब्रांड्स की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
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