कमाई में 96% गिरावट से सिएट के शेयरों में बड़ी टूट, निवेशकों ने दिखाई नाराजगी
खबर सार :-
सिएट के पहली तिमाही के नतीजों ने स्पष्ट किया कि मजबूत बिक्री के बावजूद बढ़ती लागत कंपनी की लाभप्रदता पर भारी पड़ रही है। मुनाफे में 96 प्रतिशत की गिरावट और कमजोर मार्जिन के चलते शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। आने वाले समय में कच्चे माल की कीमतें, लागत नियंत्रण और मांग की स्थिति कंपनी के प्रदर्शन और निवेशकों की धारणा तय करेंगी।
खबर विस्तार : -
Stock Market Update: टायर निर्माता कंपनी सिएट (CEAT) के पहली तिमाही के कमजोर वित्तीय नतीजों ने निवेशकों को निराश कर दिया। वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 96 प्रतिशत तक गिरने के बाद शुक्रवार को शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत होते ही सिएट का शेयर 9 प्रतिशत से अधिक टूट गया। हालांकि कंपनी की आय में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन बढ़ती परिचालन लागत और महंगे कच्चे माल ने मुनाफे को बुरी तरह प्रभावित किया।
बाजार खुलते ही शुक्रवार को सिएट का शेयर पिछली क्लोजिंग 3,829.60 रुपये के मुकाबले 9.3 प्रतिशत गिरकर 3,471.10 रुपये तक पहुंच गया। शुरुआती झटके के बाद भी शेयर में दबाव बना रहा। सुबह 10:47 बजे तक यह 7.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 3,548 रुपये पर कारोबार कर रहा था। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के उम्मीद से कमजोर नतीजों के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे शेयर में तेज गिरावट आई।
अप्रैल-जून तिमाही में समेकित शुद्ध लाभ घटकर मात्र 4 करोड़ तक पहुंचा
कंपनी द्वारा जारी वित्तीय परिणामों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में समेकित शुद्ध लाभ घटकर मात्र 4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 112 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। इस तरह सालाना आधार पर मुनाफे में करीब 96 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो निवेशकों के अनुमान से कहीं अधिक रही। हालांकि कंपनी के कारोबार में विस्तार जारी रहा। परिचालन से प्राप्त राजस्व सालाना आधार पर 22.4 प्रतिशत बढ़कर 4,318 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान अवधि में कंपनी का राजस्व 3,529 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि दर्शाती है कि बाजार में टायरों की मांग मजबूत बनी हुई है और कंपनी विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में अपनी बिक्री बढ़ाने में सफल रही है। इसके बावजूद बढ़ती लागत ने बेहतर बिक्री का लाभ कंपनी को नहीं मिलने दिया। कंपनी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण प्राकृतिक रबर और अन्य कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई। यही वजह रही कि बिक्री बढ़ने के बावजूद लाभ में भारी गिरावट दर्ज हुई।
इनपुट लागत में बढ़ोतरी का असर
सिएट के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्नब बनर्जी ने कहा कि इनपुट लागत में बढ़ोतरी का असर कम करने के लिए कंपनी ने चरणबद्ध तरीके से टायरों की कीमतों में वृद्धि की। इसके साथ ही कंपनी ने बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने और मांग को प्रभावित न होने देने पर भी ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही में भी कच्चे माल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने की संभावना है, जिससे मार्जिन पर दबाव जारी रह सकता है। कंपनी का परिचालन प्रदर्शन भी कमजोर रहा। अप्रैल-जून तिमाही में एबिटा (EBITDA) सालाना आधार पर 5.7 प्रतिशत घटकर 365 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 387 करोड़ रुपये था। एबिटा मार्जिन भी घटकर 8.5 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 11 प्रतिशत था। इससे स्पष्ट है कि लागत बढ़ने का सीधा असर कंपनी की परिचालन लाभप्रदता पर पड़ा।
ऑटो सेक्टर में मांग मजबूत होने के बावजूद बड़ी चुनौती
विश्लेषकों का कहना है कि ऑटो सेक्टर में मांग मजबूत होने के बावजूद टायर कंपनियों के लिए कच्चे माल की ऊंची कीमतें बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। यदि प्राकृतिक रबर, कच्चे तेल और अन्य इनपुट की लागत में जल्द राहत नहीं मिलती, तो आने वाली तिमाहियों में भी कंपनियों के मार्जिन दबाव में रह सकते हैं। शेयर बाजार में भी सिएट का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से कमजोर बना हुआ है। पिछले एक वर्ष में कंपनी का शेयर करीब 8 प्रतिशत गिर चुका है। बीते छह महीनों में इसमें 8 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई है, जबकि वर्ष 2026 में अब तक शेयर लगभग 6 प्रतिशत टूट चुका है। कमजोर तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों की धारणा और सतर्क हो गई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के लिए आगे की सबसे बड़ी चुनौती लागत नियंत्रण और लाभप्रदता में सुधार होगी। यदि कच्चे माल की कीमतों में नरमी आती है और कंपनी बढ़ी हुई कीमतों का लाभ बनाए रखने में सफल रहती है, तो आने वाली तिमाहियों में प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर दूसरी तिमाही के नतीजों और लागत संबंधी संकेतों पर रहेगी।
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