नई दिल्लीः भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच 2024 में अनिवासी भारतीयों के लिए वित्तीय लेनदेन को लेकर हुए समझौते का असर दिखने लगा है। संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीय प्रवासी भी अब धड़ल्ले से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने लगे हैं। इसके लिए उन्हें अपने अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों को यूपीआई में रजिस्टर्ड कराना पड़ता है। इस कदम का उद्देश्य खाड़ी देश में रहने वाले अनिवासी भारतीयों यानी एनआरआई के लिए वित्तीय लेनदेन को आसान बनाना है।
यूपीआई सेवाओं का इस्तेमाल करने के लिए अनिवासी भारतीयों (NRI) के पास किसी ऐसे भारतीय बैंक में एक अनिवासी बाह्य (NRE) या अनिवासी साधारण (NRO) खाता होना चाहिए, जो यह सेवा प्रदान करता हो। इन खातों से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय फोन नंबर उस बैंक में पंजीकृत होना चाहिए और उसका KYC भी अपडेट होना चाहिए। इस तरह, अनिवासी भारतीय क्यूआर कोड स्कैन करके या प्राप्तकर्ता का फोन नंबर या यूपीआई आईडी दर्ज करके 24/7 तुरंत धन हस्तांतरण कर सकते हैं। कई भारतीय बैंकों ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने वाले अनिवासी भारतीयों के लिए यूपीआई सेवाएं एक्टिवेट कर दी हैं। इनमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक , एक्सिस बैंक, फेडरल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी), केनरा बैंक और इंडसइंड बैंक आदि शामिल हैं। यूएई से जुड़े भारतीय, अपने बैंक खाते से यूपीआई के माध्यम से किसी भारतीय को पैसे तुरंत ट्रांसफर कर सकते हैं। इसके लिए, उपयोगकर्ता अपने बैंक के मोबाइल ऐप या फोनपे या भीम जैसे स्वीकृत डिजिटल भुगतान ऐप में यूपीआई सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
फोनपे या भीम यूपीआई ऐप की सेवाओं का लाभ लेने के लिए अनिवासी भारतीयों को अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड कराना होगा। उपयोगकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका एनआरई/एनआरओ खाता केवाईसी-अनुपालन योग्य है और उनका यूएई मोबाइल नंबर खाते से जुड़ा हुआ है। इसके बाद, उन्हें किसी सहभागी बैंक ऐप या यूपीआई ऐप को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना होगा और अपने अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर से पंजीकरण संबंधी कार्य पूरा करना होगा। पंजीकरण हो जाने के बाद, फोनपे या भीम ऐप का इस्तेमाल करके आप किसी भी व्यक्ति को उसकी यूपीआई आईडी के माध्यम से या क्यूआर कोड स्कैन करके आसानी से भुगतान कर सकते हैं।
यूपीआई सेवाओं की शुरुआत यूएई में रहने वाले भारतीयों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है। इससे वे भारत में बिजली के बिल, स्कूल की फीस या किसी भी घरेलू खर्च का भुगतान बिना किसी अलग प्लेटफॉर्म या सिम कार्ड का इस्तेमाल किए आसानी से कर सकते हैं। यूपीआई से किसी भी ऑनलाइन लेन-देन की सीमा 100,000 रुपये यानी (Dh4,4000) तय की गई है। हालांकि, बैंक कुछ विशेष मामलों में लिमिट को बढ़ा भी सकता है।
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