India-EU FTA : भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच हुआ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) केवल दो आर्थिक क्षेत्रों के बीच समझौता भर नहीं है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार बाजार और वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सीईओ आशीष चौहान के बयानों से स्पष्ट है कि यह समझौता आने वाले वर्षों में भारत-ईयू संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
एनएसई (NSE) के सीईओ आशीष चौहान (Ashesh Chauhan) के अनुसार, भारत-ईयू एफटीए (India-EU FTA) से खासतौर पर उन उद्योगों को लाभ मिलेगा जो श्रम पर अधिक निर्भर हैं। कपड़ा, चमड़ा, जेम्स-ज्वेलरी, फूड प्रोसेसिंग और लघु एवं मध्यम उद्योगों को यूरोपीय बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर नए रोजगार अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने इसे “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील” बताते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर जब बहुपक्षीय व्यापार कमजोर हो रहा है, तब बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय समझौते भारत के लिए सही दिशा में कदम हैं।
चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और ईयू की संयुक्त अर्थव्यवस्था विश्व की कुल जीडीपी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। वर्तमान में दोनों के बीच करीब 220 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हो रहा है, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं दोनों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में एफटीए से व्यापारिक लेन-देन और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। बजट को लेकर उन्होंने कहा कि बाजार को कर राहत की उम्मीद रहती है, लेकिन सरकार राजकोषीय अनुशासन को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लेती है।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने नई दिल्ली में आयोजित भारत-ईयू बिजनेस फोरम में इस समझौते को भारत-यूरोपीय यूनियन रिश्तों में “नए युग का शंखनाद” बताया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय यूनियन के नेताओं का भारत के गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना, सबसे बड़ा एफटीए संपन्न होना और इतने बड़े स्तर पर बिजनेस फोरम का आयोजन, दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच अभूतपूर्व तालमेल का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत-ईयू व्यापार दोगुना होकर 180 बिलियन यूरो तक पहुंच चुका है। आज भारत में 6,000 से अधिक यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं, जबकि भारत की करीब 1,500 कंपनियां यूरोप में कारोबार कर रही हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह एफटीए बिजनेस समुदाय के लिए एक स्पष्ट और सकारात्मक संदेश देता है।
पीएम मोदी ने व्यापारिक साझेदारी को तीन प्रमुख प्राथमिकताओं से जोड़ा। पहली, ईवी, बैटरी, चिप्स और फार्मा एपीआई जैसे क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता कम कर भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित करना। दूसरी, डिफेंस, स्पेस, टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाना। और तीसरी, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर एनर्जी, स्मार्ट ग्रिड, सस्टेनेबल मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त निवेश और शोध को गति देना। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह एफटीए किसानों, छोटे उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे खोलेगा और सर्विसेज सेक्टर में सहयोग को भी मजबूत करेगा। कुल मिलाकर, भारत-ईयू एफटीए को साझा समृद्धि, रोजगार सृजन और टिकाऊ विकास के नए ब्लूप्रिंट के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका को और मजबूत करेगा।
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