लखनऊ : खराब कलेक्शन एफिशिएंसी को आधार बनाकर सूबे के 42 जनपदों की बिजली आपूर्ति व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है। वहीं, विद्युत नियामक आयोग द्वारा कलेक्शन एफिशिएंसी की तलब की गई रिपोर्ट में पावर कॉरपोरेशन ने लगातार कलेक्शन एफिशिएंसी बढ़ने का जवाब दाखिल किया है। नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन 2025 के तहत वर्ष 2020-21 से लेकर वर्ष 2025-26 तक की कलेक्शन एफिशिएंसी की पूरी रिपोर्ट तलब की थी।
बिजली कम्पनियों ने नियामक आयोग में जवाब दाखिल किया कि वर्ष 2020-21 से लेकर वर्ष 2023-24 तक तैयार की गई ऑडिट बैलेंस शीट के आधार पर कलेक्शन एफिशिएंसी लगातार बढ़ रही है। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि बिजली कम्पनियों की ओर से दाखिल आंकड़ों से स्पष्ट है कि कलेक्शन एफिशिएंसी में लगातार सुधार हो रहा है। ऐसे में ऊर्जा प्रबंधन बिजली कम्पनियों को बेचने के लिए अलग तस्वीर दिखा रहा है।
प्रदेश की बिजली कम्पनियों और यूपीपीसीएल ने ऑडिटेड आंकड़ों के आधार पर कलेक्शन एफिशिएंसी का आंकड़ा विद्युत नियामक आयोग में दाखिल किया है। आंकड़े से स्वतः सिद्ध हो रहा है कि कलेक्शन एफिशिएंसी में बेहतर सुधार हो रहा है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिजली कम्पनियों का निजीकरण क्यों किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष पूर्वांचल दक्षिणांचल
2020-21 85.14 92.86
2021-22 74.37 92.75
2022-23 88.36 96.87
2023-24 104.03 98.09
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