लखनऊ: पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम के 42 जनपदों की बिजली आपूर्ति व्यवस्था के निजीकरण को लेकर कर्मचारी संगठनों और ऊर्जा प्रबंधन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों ने जहां 29 मई से कार्य बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया है तो वहीं ऊर्जा प्रबंधन इसे हड़ताल मान रहा है। सोमवार से बिजली कर्मियों ने यूपीपीसीएल प्रबंधन के साथ पूर्ण असहयोग शुरू किया है। हालांकि उपभोक्ताओं की समस्याओं को दूर करने में पूरा सहयोग करेंगे।
वहीं, कर्मचारी संगठनों ने यूपीपीसीएल प्रबंधन पर विरोध प्रदर्शन को हड़ताल का रूप देने का आरोप लगाया है। अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कार्यालय समय के बाद ऊर्जा प्रबंधन के साथ पूर्ण असहयोग के तहत किसी भी बैठक, वीडियो कांफ्रेसिंग में शामिल नहीं होने का फैसला लिया गया है। वहीं, राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में निजीकरण के खिलाफ संघर्ष समिति का सहयोग करने का निर्णय लिया गया है।
जेई संगठन अब निजीकरण के विरोध में होने वाले आंदोलन समेत सभी कार्यक्रम संघर्ष समिति के साथ करेगा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में निजीकरण के विरोध में चल रहे ध्यानाकर्षण आंदोलन से उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की समस्या न होने देने का निर्णय लिया गया है। संघर्ष समिति 26 से 28 मई तक उपभोक्ताओं को साथ लेकर सभी जनपदों में आंदोलन चलाएगी।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 29 मई से कार्य बहिष्कार शुरू होगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों संजय सिंह चौहान, जितेंद्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, पीके दीक्षित, सुहैल आबिद ने कहा कि बीते छह माह से निजीकरण के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया जा रहा है। किसी भी सूरत में उपभोक्ताओं को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
संघर्ष समिति व अन्य संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि अस्पताल, रेलवे, पेयजल आपूर्ति समेत अन्य आवश्यक सेवाओं को बाधित होने नहीं दिया जाएगा। यूपीपीसीएल प्रबंधन द्वारा जल निगम के टैंकरों में पेयजल भरने की अनावश्यक तैयारी सिर्फ आम लोगों में भय का वातावरण पैदा करने के लिए की जा रही है। पदाधिकारियों ने जबर्दस्ती हड़ताल थोपने की साजिश रचने का आरोप लगाया है ताकि निजीकरण किया जा सके।
संघर्ष समिति ने जिला स्तर पर गठित कमेटी को संदेश भेजकर आगाह किया है कि यूपीपीसीएल प्रबंधन जानबूझकर विद्युत आपूर्ति प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह यह है कि दोनों डिस्कॉम की निविदा हासिल करने वाली कम्पनियां लखनऊ में डटीं हुई हैं।
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