लखनऊः सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने जीरो टॉलरेंस के रुख पर कायम रहते हुए समाज कल्याण विभाग में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग ने भ्रष्टाचार में लिप्त पांच अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया, जबकि तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन से स्थायी कटौती और वसूली के आदेश जारी कर दिए हैं।
यह कार्रवाई समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की निगरानी में पूरी की गई। मंत्री ने जांच रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ कुछ मामले डेढ़ दशक से अधिक समय से लंबित थे। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, उनमें श्रावस्ती की तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव प्रमुख हैं। उन पर मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना और छात्रवृत्ति योजनाओं में धनराशि में हेराफेरी का आरोप है। उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। करुणेश त्रिपाठी, तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मथुरा, पर फर्जी आईटीआई संस्थानों को करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति बांटने का आरोप साबित हुआ है। उन्हें बर्खास्त करने के साथ 19.25 करोड़ रुपये की वसूली का निर्देश जारी हुआ है।
संजय कुमार ब्यास (हापुड़) ने शासनादेश की अवहेलना करते हुए छात्रवृत्ति की रकम सीधे शिक्षण संस्थाओं को ट्रांसफर की, जिससे 2.74 करोड़ रुपये का दुरुपयोग हुआ। उनके खिलाफ भी बर्खास्तगी और वसूली की कार्रवाई हुई।
राजेश कुमार (शाहजहांपुर) पर वृद्धावस्था पेंशन योजना में अपात्रों को लाभ देने का आरोप सिद्ध हुआ है। उन्हें सेवा से हटाने के साथ 2.52 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों में श्रीभगवान (औरैया), विनोद शंकर तिवारी और उमा शंकर शर्मा (मथुरा) के नाम शामिल हैं। इनके खिलाफ क्रमशः पेंशन में 10 से 50 प्रतिशत तक की स्थायी कटौती और लाखों की वसूली के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य पुराने मामलों की भी पुनः समीक्षा की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि जनकल्याण योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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