विश्व क्षय रोग दिवस पर 'टीबी मुक्त भारत अभियान' का शंखनाद: 100 दिनों तक चलेगी जागरूकता की लहर

खबर सार :-
विश्व क्षय रोग दिवस पर श्रीगंगानगर समेत देशभर में 'टीबी मुक्त भारत अभियान' का आगाज। 100 दिनों तक चलने वाले इस विशेष अभियान में मुफ्त जांच, उपचार और निक्षय पोषण योजना का मिलेगा लाभ। जानें पूरी रिपोर्ट।

विश्व क्षय रोग दिवस पर 'टीबी मुक्त भारत अभियान' का शंखनाद: 100 दिनों तक चलेगी जागरूकता की लहर
खबर विस्तार : -

श्रीगंगानगर: घातक बीमारी क्षय रोग (टीबी) के समूल विनाश के लिए भारत ने एक बार फिर अपनी कमर कस ली है। विश्व क्षय रोग दिवस के विशेष अवसर पर मंगलवार से देशव्यापी 'टीबी मुक्त भारत अभियान' का आधिकारिक शुभारंभ किया जा रहा है। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले सहित पूरे प्रदेश में अगले 100 दिनों तक सघन जागरूकता और चिकित्सा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसका मुख्य लक्ष्य टीबी के संक्रमण को जड़ से मिटाना है।

24 मार्च से 100 दिवसीय विशेष कार्ययोजना की शुरुआत

स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष की वैश्विक थीम और निर्धारित लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए 100 दिनों का एक व्यापक और रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। यह विशेष अभियान 24 मार्च से औपचारिक रूप से प्रारंभ होकर अगले तीन महीनों से अधिक समय तक अपनी पूरी सक्रियता के साथ प्रभावी रहेगा। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यापक दायरा है; प्रशासन का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच केवल शहरी केंद्रों तक सीमित न रहकर दूर-दराज के ढाणियों और ग्रामीण अंचलों तक भी पहुंचे। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों की विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर टीबी के लक्षणों के प्रति लोगों को न केवल सचेत करेंगी, बल्कि उन्हें जांच के लिए प्रेरित भी करेंगी।

इस अभियान की सफलता के लिए चार मुख्य स्तंभों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। सबसे पहले, संभावित टीबी रोगियों की त्वरित और सटीक पहचान करना प्राथमिकता होगी ताकि संक्रमण को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके। इसके साथ ही, सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली नि:शुल्क जांच एवं परामर्श सेवाओं का दायरा और अधिक विस्तृत किया जा रहा है। एक बड़ी चुनौती उन मरीजों की होती है जो बीच में ही अपना उपचार छोड़ देते हैं; ऐसे मरीजों की निरंतर मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया जा रहा है। अंततः, इस पूरे मिशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समुदाय के बीच वर्षों से चली आ रही भ्रांतियों और डर का निवारण करना है, ताकि समाज का हर व्यक्ति इस बीमारी के विरुद्ध लड़ाई में निडर होकर सामने आ सके।

 सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला: "समय पर इलाज ही बचाव की कुंजी"

श्रीगंगानगर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अजय सिंगला ने अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि टीबी एक जानलेवा बीमारी हो सकती है, यदि इसका सही समय पर उपचार न शुरू किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि 100 दिवसीय कार्ययोजना के तहत चिकित्सा विभाग टीबी प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने जा रहा है। डॉ. सिंगला के अनुसार, अभियान का एक प्रमुख हिस्सा संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना है। इसके लिए संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए जाएंगे और संक्रमण की पुष्टि होने पर तत्काल प्रभाव से उनका इलाज शुरू किया जाएगा।

 निक्षय पोषण योजना: मरीजों को सीधे बैंक खाते में मिलेगी सहायता

इस अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी वित्तीय सहायता भी है। सरकार की निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत, प्रत्येक पंजीकृत टीबी रोगी को उनके बेहतर खान-पान और पौष्टिक आहार के लिए निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खाते (DBT) में भेजी जाएगी। विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी टीबी रोगियों की बैंक डिटेल निक्षय पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट की जाए, ताकि किसी भी मरीज को आर्थिक लाभ से वंचित न रहना पड़े। इससे न केवल मरीजों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि वे अपनी दवाइयां समय पर लेने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे।

भ्रांतियों का होगा अंत, जन-भागीदारी से बनेगा टीबी मुक्त समाज

अक्सर देखा गया है कि समाज में टीबी को लेकर एक गहरा सामाजिक कलंक (Stigma) जुड़ा होता है, जिसके डर से कई बार लोग अपनी बीमारी को छिपाने लगते हैं। यह छिपाव न केवल रोगी के लिए जानलेवा साबित होता है, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा देता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए इस 100 दिवसीय अभियान के दौरान विशेष समझाइश सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों का मुख्य उद्देश्य लोगों के मन से टीबी के प्रति डर को निकालना और उन्हें सही जानकारी देना है। डिजिटल युग की महत्ता को समझते हुए स्वास्थ्य विभाग 'आईईसी श्रीगंगानगर' के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर जागरूकता फैला रहा है। इस डिजिटल मुहिम के जरिए युवाओं और आम नागरिकों को सीधे जोड़ा जा रहा है ताकि वे अपने आस-पड़ोस में टीबी के लक्षणों वाले व्यक्तियों की पहचान करने में मदद कर सकें।

अभियान की प्रमुख झलकियां और नागरिकों के लिए संदेश

24 मार्च से शुरू होने वाले इस संकल्प का केंद्र बिंदु 100 दिनों की सघन कार्ययोजना है। इस दौरान सरकार की ओर से दी जाने वाली सभी जांच और उपचार सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क रहेंगी। इसके अतिरिक्त, मरीजों के समुचित खान-पान के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत सीधे बैंक खाते में नकद सहायता राशि प्रदान की जाएगी, ताकि पोषण के अभाव में इलाज अधूरा न रहे। टीबी मुक्त भारत का संकल्प तभी सिद्ध होगा जब हर नागरिक इस अभियान को अपनी जिम्मेदारी समझेगा। स्वास्थ्य प्रशासन ने आमजन से पुरजोर अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, शाम के समय हल्का बुखार या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें। याद रखें, समय पर की गई जांच और निरंतर लिया गया उपचार ही इस घातक बीमारी का एकमात्र समाधान है। हमारे सामूहिक प्रयास और समुदाय की सक्रिय भागीदारी ही आने वाले समय में टीबी को इतिहास का हिस्सा बनाने में सक्षम होगी।

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