सनातन चेतना का महाआह्वान: कुड़वार में सकल हिंदू सम्मेलन में गूंजा धर्म-जागरण का स्वर

खबर सार :-
सुल्तानपुर के कुड़वार बाजार स्थित पार्वती मैरिज लॉन में आयोजित सकल हिंदू सम्मेलन आस्था और संगठन शक्ति का प्रतीक बना। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मौनी महाराज ने संस्कृति, संस्कार और संगठन की शक्ति पर बल देते हुए हिंदू समाज को एकजुट होने का संदेश दिया।

सनातन चेतना का महाआह्वान: कुड़वार में सकल हिंदू सम्मेलन में गूंजा धर्म-जागरण का स्वर
खबर विस्तार : -

कुड़वार, सुल्तानपुरः क्षेत्र के कुड़वार बाजार स्थित पार्वती मैरिज लॉन में आयोजित सकल हिंदू सम्मेलन आस्था, चेतना और संगठन शक्ति का विराट प्रतीक बनकर उभरा। सम्मेलन में सगरा पीठाधीश्वर पूज्य बाबा सहजराम जी के उत्तराधिकारी अभय चैतन्य स्वामी मौनी महाराज के पावन आगमन पर वातावरण धर्ममय हो उठा। जैसे ही मौनी महाराज मंच पर पधारे, उपस्थित जनसमूह ने उन्हें श्रद्धा और सम्मान से नमन किया।

अनेक विशिष्ट अतिथि रहे मौजूद

क्षेत्र की वरिष्ठ समाजसेविका एवं भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय ने मौनी महाराज का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर भव्य स्वागत-अभिनंदन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राम सूरत तिवारी ने की, जबकि मंच की शोभा बढ़ाने वालों में हंडिया आश्रम से पधारे पूज्य श्री दंडी स्वामी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला विभाग प्रचारक श्री प्रकाश, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री श्रीमती दिव्या सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

मौनी महाराज ने किया संबोधित

सम्मेलन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी जन सम्मिलित हुए, जिससे आयोजन स्थल पर उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। अवसर था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विराट हिंदू सम्मेलन का, जिसने जनमानस को एकसूत्र में बाँधने का कार्य किया।  

अपने ओजस्वी एवं प्रखर उद्बोधन में मौनी महाराज ने कहा कि “हिंदू तब जागेगा, जब वह अपनी संस्कृति, संस्कार और संगठन की शक्ति को पहचानेगा।” उन्होंने हिंदू समाज को आत्मचिंतन, आत्मबोध और एकता का संदेश देते हुए कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि राष्ट्र, समाज और संस्कृति की रक्षा का संकल्प है। उनके शब्दों ने उपस्थित जनसमूह में नवचेतना का संचार कर दिया और सभा “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठी। कुल मिलाकर, यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन चेतना के पुनर्जागरण का सशक्त मंच सिद्ध हुआ, जिसने हिंदू समाज को संगठित, सजग और समर्थ बनने का आह्वान किया।

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