नए साल पर थानेदार का मानवीय चेहरा, जरूरतमंदों को कंबल बांटकर मनाया नववर्ष

खबर सार :-
सुल्तानपुर के बंधुआकलां थाना क्षेत्र में थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कड़ाके की ठंड में गरीब, असहाय लोगों और ड्यूटी पर तैनात चौकीदारों को कंबल वितरित किए। इस सराहनीय कदम से जरूरतमंदों के चेहरे खिल उठे और पुलिस की संवेदनशील छवि और मजबूत हुई।

नए साल पर थानेदार का मानवीय चेहरा, जरूरतमंदों को कंबल बांटकर मनाया नववर्ष
खबर विस्तार : -

सुल्तानपुरः नए वर्ष 2026 की शुरुआत बंधुआकलां थाना क्षेत्र में एक सराहनीय और मानवीय पहल के साथ हुई, जिसने पुलिस और आमजन के बीच भरोसे को और मजबूत किया। जहां आमतौर पर नया साल निजी आयोजनों और उत्सवों के साथ मनाया जाता है, वहीं बंधुआकलां थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने नववर्ष को सेवा और संवेदना का पर्व बनाते हुए जरूरतमंदों के चेहरों पर मुस्कान लाने का कार्य किया।

चौकीदारों को बांटे गए कंबल

कड़ाके की ठंड के बीच थाना परिसर में आयोजित इस मानवीय कार्यक्रम में थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने गरीब, असहाय, बेसहारा लोगों और ड्यूटी पर तैनात चौकीदारों को कंबल वितरित किए। इस दौरान उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर जरूरतमंदों को कंबल सौंपे, जिससे यह संदेश साफ गया कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था की प्रहरी ही नहीं, बल्कि समाज की सच्ची सेवक भी है।
कंबल पाकर जरूरतमंदों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी। कई बुजुर्गों और गरीबों ने थानाध्यक्ष को दुआएं दीं और इस पहल को नए साल का सबसे बड़ा तोहफा बताया। ठंड से जूझ रहे लोगों के लिए यह सहायता किसी संजीवनी से कम नहीं थी।

क्षेत्रवासियों ने की सराहना

इस अवसर पर थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा कि “नए साल की असली खुशी तब होती है, जब समाज के कमजोर वर्ग को राहत मिले। पुलिस का दायित्व केवल अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील रहना भी हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों ने इस पहल की जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि ऐसे मानवीय कार्य पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करते हैं और आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास को बढ़ाते हैं। बंधुआकलां थाना क्षेत्र में थानाध्यक्ष की यह पहल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।
नववर्ष की इस शुरुआत ने यह साबित कर दिया कि जब वर्दी में संवेदना जुड़ जाती है, तो समाज में बदलाव की एक नई मिसाल कायम होती है।

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