लखनऊ : सड़क हादसों में सिर पर चोट लगने वाले करीब 49 प्रतिशत लोग रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। हादसों में घायल आधे लोग हास्पिटल ही पहुंच नहीं पाते हैं। घायलों की या तो मौके पर ही मौत हो जाती है अथवा हास्पिटल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दो पहिया वाहन चालकों की होती है।
राजधानी लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लोहिया संस्थान और प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल कॉलेज के संयुक्त अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है। इस अध्ययन को जर्नल ऑफ फोरेंसिक मेडिसिन एंड साइंस के मई के अंक में प्रकाशित किया गया है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन हॉस्पिटल) में सिर में चोट के बाद पहुंचे 604 मरीजों को लेकर यह अध्ययन किया गया। ये सभी मरीज अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के बीच सड़क हादसे में घायल हुए थे।
इन मरीजों की मौत इलाज के दौरान हो गई थी। अध्ययन के दौरान पाया गया कि सिर की चोट के बाद दम तोड़ने वालों में 51 प्रतिशत से अधिक की मृत्यु हॉस्पिटल में इलाज के समय हुई। करीब 22 प्रतिशत की मौत हादसे वाले स्थान यानि मौके पर ही हो गई। वहीं, 27 प्रतिशत के करीब घायलों की मौत हॉस्पिटल ले जाते समय रास्ते में हो गई। यानि करीब 49 प्रतिशत घायल हॉस्पिटल तक नहीं पहुंच सके।
अध्ययन के अनुसार, सड़क हादसों में सिर की चोट वाले कुल घायलों में 52 प्रतिशत से अधिक दो पहिया वाहन सवार थे। सेकेंड नंबर पर 25 प्रतिशत से अधिक फोर व्हीलर वाले थे। सिर में चोट वाले अन्य घायलों में 8 से अधिक पैदल चलने वाले, 6 प्रतिशत से अधिक साइकिल सवार, 2 प्रतिशत से अधिक तिपहिया वाहन सवार और 5 प्रतिशत अन्य शामिल थे। अध्ययन के अनुसार, करीब 53 प्रतिशत लोग मुख्य मार्ग पर हुई दुर्घटना में घायल हुए।
26 प्रतिशत से अधिक लोग मुख्य मार्ग के मोड़ पर घायल हुए। 8 प्रतिशत से अधिक लोग गलियों में और 11 प्रतिशत से अधिक लोग गली के मोड़ पर घायल हुए। इसी प्रकार 43 प्रतिशत से अधिक लोग आमने-सामने की टक्कर में घायल हुए। 21 प्रतिशत से अधिक लोग खुद वाहन से गिरकर चोट खा बैठे। 53 प्रतिशत से अधिक मामलों में दो गाड़ियों की टक्कर हुई जबकि 25 प्रतिशत से अधिक मामलों में दो से अधिक वाहन आपस में टकराए।
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