पीलीभीत: ग्राम पंचायत खरौंसा में विकास के नाम पर घोटाले के आरोप, कागजों में काम – ज़मीन पर सन्नाटा

खबर सार :-
पीलीभीत के विकास खंड मरौरी इलाके की खरौंसा ग्राम पंचायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और सचिव मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगाने में लगे हुए हैं। गांव में कहीं भी विकास नहीं दिख रहा ।

पीलीभीत: ग्राम पंचायत खरौंसा में विकास के नाम पर घोटाले के आरोप, कागजों में काम – ज़मीन पर सन्नाटा
खबर विस्तार : -

पीलीभीतः जनपद के विकास खण्ड मरौरी क्षेत्र की ग्राम पंचायत खरौंसा में ग्राम प्रधान और सचिव पर सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास कार्य कहीं दिखाई नहीं दे रहे, लेकिन सरकारी कागज़ों में सभी योजनाएं पूरी दर्शाई गई हैं।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में न तो साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नजर आती है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं। साफ-सफाई के नाम पर बजट निकाला जा चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।

लाइटों के नाम पर दिखावा

हाल ही में क्षेत्र में चोरी और लूट की अफवाहों को देखते हुए जिला अधिकारी द्वारा ग्रामीण और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चौराहों से लेकर हर ग्राम पंचायत में स्ट्रीट लाइट लगवाने के निर्देश दिए गए थे, ताकि जनता में सुरक्षा की भावना बनी रहे।

लेकिन खरौंसा गांव में प्रधान और सचिव ने लाइटों के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई। गांव में जगह-जगह खंभों पर छोटे-छोटे बल्ब टांग दिए गए, जिनकी कीमत मात्र 20 से 30 रुपये प्रति बल्ब बताई जा रही है। इसके बावजूद आरोप है कि करीब 35 हजार रुपये की राशि निकाल ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इतनी बड़ी रकम सही तरीके से खर्च होती तो पूरा गांव रोशनी से जगमगा उठता।

विद्यालय में बच्चों को नहीं मिल रहा पीने का पानी

ग्राम पंचायत से जुड़ा एक और गंभीर मामला प्राथमिक विद्यालय का है। जहां शिक्षा के मंदिर में पढ़ने आने वाले बच्चों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय परिसर में सरकारी हैंडपंप तो लगे हैं, लेकिन उनके हैंडल गायब हैं, जिससे पानी नहीं निकल पा रहा।

ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चे बिना पानी के कैसे समय बिता रहे हैं, या फिर उन्हें पानी पीने के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है।

प्रधान का गैर-जिम्मेदाराना बयान

जब इस मामले में ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि

“सरकारी विद्यालयों से हमारा कोई मतलब नहीं है, उनकी देखरेख की जिम्मेदारी शिक्षकों की है।”

प्रधान के इस बयान से ग्रामीणों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब गांव की जिम्मेदारी जनता ने प्रधान को सौंपी है, तो पंचायत के बच्चों की बुनियादी जरूरतों से पल्ला झाड़ना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 

अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन आरोपों की जांच करेगा, या फिर ग्राम पंचायत में सरकारी धन की बंदरबांट ऐसे ही चलती रहेगी।

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