कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में मासूम छात्रा की बेरहमी से पिटाई, जांच में जुटी पुलिस

खबर सार :-
योगी सरकार सरकारी हॉस्टल में बच्चों को बेहतर शिक्षा और बेहतर माहौल देने की कोशिश कर रही है। इस बीच, अधिकारी और टीचर इन कोशिशों पर पानी फेर रहे हैं। पूरी घटना शनिवार को बंडा विकासखंड क्षेत्र के कस्तूरबा गांधी रेसिडेंशियल स्कूल, डभौरा सेवा में हुई।

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में मासूम छात्रा की बेरहमी से पिटाई, जांच में जुटी पुलिस
खबर विस्तार : -

शाहजहांपुरः जिले के विकासखंड बंडा क्षेत्र स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय डभौरा सेवा में एक मासूम छात्रा की बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय की एक महिला अध्यापिका ने छात्रा को सिर्फ इसलिए डंडे से पीटा क्योंकि उसने शिक्षिका के कपड़े धोने से इनकार कर दिया था। घटना के बाद परिजन बच्ची को लेकर थाने पहुंचे और आरोपी अध्यापिका के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

निजी कपड़े धोने को कह रही थी शिक्षिका

जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार की बताई जा रही है। छात्रा का आरोप है कि अध्यापिका ने उसे अपने निजी कपड़े धोने के लिए कहा। जब उसने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह पढ़ने आई है और यह उसका काम नहीं है, तो शिक्षिका गुस्से में आ गईं। आरोप है कि इसके बाद अध्यापिका ने छात्रा को अन्य बच्चों के सामने डंडे से दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। मारपीट इतनी ज्यादा की गई कि डंडा तक टूट गया और बच्ची के शरीर पर चोट के निशान पड़ गए।

जांच में जुटी पुलिस

पीड़ित छात्रा ने परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिवार वाले उसे लेकर स्थानीय थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। परिजनों का कहना है कि विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है, लेकिन यहां शिक्षक ही बच्चों से निजी काम करवा रहे हैं और मना करने पर मारपीट कर रहे हैं। उन्होंने दोषी अध्यापिका के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित अधिकारियों से भी जानकारी ली जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अध्यापिका ने आरोपों का बताया निराधार

वहीं, आरोपित अध्यापिका ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि छात्रा द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं हैं और उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले ने विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गौरतलब है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय योजना का उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को सुरक्षित आवासीय वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं योजना की मंशा पर आघात करती हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि सच्चाई क्या सामने आती है और दोषी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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