एनसीआर में प्रदूषण का कहर: 400 के पार एक्यूआई, सांस लेना हुआ मुश्किल

खबर सार :-
एनसीआर में बढ़ता वायु प्रदूषण एक गंभीर चेतावनी है। जब तक मौसम में बदलाव नहीं होता या ठोस सरकारी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक राहत की उम्मीद कम है। आम लोगों को सावधानी बरतने के साथ-साथ प्रदूषण कम करने में अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी, तभी आने वाले समय में हालात सुधर सकते हैं।

एनसीआर में प्रदूषण का कहर: 400 के पार एक्यूआई, सांस लेना हुआ मुश्किल
खबर विस्तार : -

Delhi NCR AQI: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एक बार फिर वायु प्रदूषण ने खतरनाक स्तर छू लिया है। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के अधिकांश इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार दर्ज किया जा रहा है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। स्मॉग की मोटी चादर ने पूरे क्षेत्र को ढक लिया है, जिससे आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।

गाजियाबाद और नोएडा में भी हालात बिगड़े

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के शहर भी प्रदूषण की चपेट में हैं। गाजियाबाद के इंदिरापुरम में एक्यूआई 410, लोनी में 435, वसुंधरा में 439 और संजय नगर में 335 दर्ज किया गया। वहीं नोएडा के सेक्टर-1 में एक्यूआई 411, सेक्टर-116 में 409, सेक्टर-125 में 406 और सेक्टर-62 में 385 रिकॉर्ड किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा।

दिल्ली में सबसे ज्यादा खराब हवा

राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। आनंद विहार में एक्यूआई 444, अशोक विहार में 442, रोहिणी में 438, पंजाबी बाग में 436 और पटपड़गंज में 434 दर्ज किया गया। इसके अलावा आरके पुरम (420), सोनिया विहार (417), बवाना (416) और ओखला फेज-2 (415) में भी हवा जहरीली बनी हुई है। चांदनी चौक, डीयू, सिरीफोर्ट और श्री अरबिंदो मार्ग जैसे इलाकों में भी स्थिति बेहद खराब है।

मौसम बना प्रदूषण का बड़ा कारण

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में फिलहाल किसी बड़ी राहत की उम्मीद नहीं है। 20 से 22 जनवरी के बीच मध्यम कोहरे की संभावना जताई गई है। हवा की गति कम रहने और ठंडे मौसम के कारण प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं। भले ही विजिबिलिटी सामान्य बताई जा रही हो, लेकिन स्मॉग की परत प्रदूषण को और गंभीर बना रही है।

प्रदूषण के पीछे ये हैं प्रमुख वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसमी परिस्थितियां मिलकर इस स्थिति को और बिगाड़ रही हैं। पराली जलाने का असर भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, जिसका प्रभाव एनसीआर की हवा पर साफ देखा जा सकता है।

स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी है। आंखों में जलन, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और घर के अंदर रहने की अपील की जा रही है।

 

 

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