झांसी: मार्च का महीना आते ही सरकारी विभागों के बीच बकाये की वसूली को लेकर खींचतान तेज हो गई है। झांसी का प्रमुख बिजौली औद्योगिक क्षेत्र इस समय विकास की कमी और भारी-भरकम टैक्स नोटिस के कारण चर्चा में है। झांसी नगर निगम ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीड़ा) को लगभग 12 करोड़ रुपये के गृह कर (हाउस टैक्स) बकाया का नोटिस थमा दिया है। इस नोटिस के बाद दोनों बड़े विभागों के बीच पत्राचार का दौर शुरू हो गया है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के समाधान पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
इस पूरे मामले पर झांसी के अपर नगर आयुक्त राहुल यादव ने नगर निगम के रुख को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की सीमा के भीतर आने वाले हर भवन और परिसर से गृह कर लेना अनिवार्य है, फिर चाहे वहां सफाई या विकास कार्य संबंधित विभाग द्वारा स्वयं ही क्यों न कराए जा रहे हों। राहुल यादव के अनुसार, इसी नियम के तहत बिजौली स्थित यूपीसीड़ा को 12 करोड़ रुपये का गृह कर का नोटिस दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि केवल यूपीसीड़ा ही नहीं, बल्कि 11 अन्य विभागों से भी मार्च माह में बकाये की वसूली के लिए सघन प्रयास किए जा रहे हैं ताकि राजस्व लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
बिजौली औद्योगिक क्षेत्र की जमीनी हकीकत काफी चिंताजनक है। यहाँ चारों तरफ गंदगी फैली हुई है और सड़कों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। विडंबना यह है कि नगर निगम अपनी नियमावली का हवाला देते हुए कहता है कि वह किसी भी सरकारी या निजी परिसर के अंदर सफाई व्यवस्था नहीं करता। चूंकि बिजौली अभी तक पूर्ण रूप से नगर निगम को हैंडओवर नहीं हुआ है, इसलिए वहां सफाई और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी यूपीसीड़ा पर ही है। पूर्व में हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू तो हुई थी, लेकिन करोड़ों रुपये के बजट प्रस्ताव के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
नगर निगम ने केवल यूपीसीड़ा ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य बड़े बकायेदारों की भी एक सूची तैयार की है। इस लिस्ट में बिजली विभाग का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिस पर लगभग ढाई करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है। नगर निगम प्रशासन ने 31 मार्च की समय सीमा से पहले 50 से अधिक विभागों से वसूली के प्रयास तेज कर दिए हैं। अब तक 40 विभाग अपना बकाया चुका चुके हैं, लेकिन यूपीसीड़ा जैसे बड़े संस्थानों के साथ अभी भी 'टैक्स की जंग' जारी है।
विभागों के बीच चल रहे इस वित्तीय विवाद का सीधा असर बिजौली के औद्योगिक परिवेश पर पड़ रहा है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में काम कर रहे उद्यमियों का मानना है कि जब वे भारी टैक्स देते हैं, तो उन्हें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलना चाहिए। अब देखना यह होगा कि 31 मार्च तक यूपीसीड़ा इस भारी-भरकम राशि का भुगतान करता है या फिर विकास के अभाव का तर्क देकर यह विवाद और लंबा खिंचता है।
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