पीलीभीत में जल संकट पर सख्त हुईं पालिका अध्यक्ष, जल अभियंता को दो दिन का अल्टीमेटम

खबर सार :-
पीलीभीत में पेयजल संकट गहराने पर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल ने जलकल विभाग को फटकार लगाई। पाइपलाइन शिफ्टिंग से प्रभावित जलापूर्ति सुधारने के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

पीलीभीत में जल संकट पर सख्त हुईं पालिका अध्यक्ष, जल अभियंता को दो दिन का अल्टीमेटम
खबर विस्तार : -

पीलीभीत नगर में पिछले कई दिनों से जारी पेयजल संकट ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में पानी की आपूर्ति बाधित होने से लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जलकल विभाग के अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है।

दो दिन के भीतर जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए : नगर पालिका अध्यक्ष

नगर पालिका अध्यक्ष ने जलकल अभियंता और संबंधित प्रभारी अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए निर्देश दिए हैं कि दो दिन के भीतर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दरअसल, वाटर वर्क्स परिसर में बन रहे कम्युनिटी हॉल के निर्माण कार्य के चलते पुरानी पाइपलाइन को शिफ्ट किया जा रहा है। इस कार्य में बरती गई लापरवाही के कारण शहर की मुख्य जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो गई। कई मोहल्लों में तो पानी पूरी तरह बंद है, जबकि कुछ इलाकों में गंदा और मिट्टी युक्त पानी सप्लाई किया जा रहा है।

दूषित जल की आपूर्ति से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और संक्रामक बीमारियों का खतरा

डॉ. आस्था अग्रवाल ने बताया कि उन्हें लगातार नागरिकों से शिकायतें मिल रही थीं। लोगों का कहना है कि पानी की किल्लत के कारण दैनिक जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। वहीं दूषित जल की आपूर्ति से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। पालिका अध्यक्ष ने जलकल विभाग को भेजे गए पत्र में साफ शब्दों में कहा है कि नगरवासियों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना नगर पालिका की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पाइपलाइन शिफ्टिंग के दौरान आई तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए और लीकेज की समस्या को प्राथमिकता पर ठीक किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर जलापूर्ति सुचारू नहीं हुई और पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। इस सख्त रुख के बाद जलकल विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और व्यवस्था सुधारने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

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