अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर  64 महिलाओं को मिला ‘स्वयंसिद्धा सम्मान’

खबर सार :-
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर  ‘स्वयंसिद्धा सम्मान’ समारोह आयोजित किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 64 महिलाओं को सम्मानित किया गया। इन महिलाओं को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके योगदान को सराहा गया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर  64 महिलाओं को मिला ‘स्वयंसिद्धा सम्मान’
खबर विस्तार : -

अयोध्याः अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शहीद भगत सिंह ट्रस्ट द्वारा आभा होटल, मोतीबाग में एक प्रेरणादायी एवं गरिमामय कार्यक्रम ‘स्वयंसिद्धा सम्मान’ का भव्य आयोजन किया गया। ‘नई सदी – नई स्त्री – नई संभावनाएं’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित करना तथा बदलते समय में स्त्री की भूमिका, चुनौतियों और संभावनाओं पर गंभीर विमर्श करना था। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे प्रारंभ होकर अपराह्न 4 बजे तक चला, जिसमें लगभग 250 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक, अधिवक्ता, पत्रकार, साहित्यकार तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवी शामिल थे।

न्याय और सम्मान के लिए संघर्ष का आह्वान

कार्यक्रम की शुरुआत युवा संगीतज्ञ रमा वर्मा के मधुर बांसुरी वादन से हुई, जिसने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह एवं बैच अलंकरण के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एन.डी.कृ.वि.वि., कुमारगंज, अयोध्या की सेवानिवृत्त वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ. निशात अख़्तर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पूनम सूद तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सुल्तानपुर से आई शिक्षिका ममता सिंह उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ शायर मुजम्मिल फिदा ने अपनी प्रभावशाली और काव्यात्मक शैली में किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. निशात अख़्तर ने कहा कि भारतीय समाज में स्त्री आंदोलन की परिस्थितियाँ पश्चिमी देशों से अलग रही हैं क्योंकि हमारी सामाजिक संरचना, पारिवारिक व्यवस्था और सांस्कृतिक परंपराएँ भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक स्त्री को स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझना होगा। उन्होंने महिलाओं से संगठित होकर समानता, न्याय और सम्मान के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से महिलाएँ समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।

विशिष्ट अतिथि ममता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पुरुषों के विरोध का दिन नहीं है, बल्कि समाज में स्त्री-पुरुष की साझेदारी और समान भागीदारी को रेखांकित करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि यदि आज एक स्त्री अपनी आवाज़ बुलंद कर पा रही है तो उसके पीछे लंबे समय से चल रहा संघर्ष और अनेक महिलाओं के त्याग की कहानी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को स्त्री को केवल देवी या पारंपरिक प्रतीकों तक सीमित देखने की मानसिकता से आगे बढ़ना होगा और उसे एक सामान्य मनुष्य के रूप में समान अवसर प्रदान करने होंगे।

अल्पसंख्यक महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा

मुख्य अतिथि डॉ. पूनम सूद ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं के सामने अनेक नई चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिनका सामना समझदारी और साहस के साथ करना होगा। उन्होंने कहा कि नई सदी की स्त्री केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक ही नहीं है, बल्कि वह समाज के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को पुरुषों के साथ मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए, जहाँ समानता, संवेदनशीलता और न्याय के मूल्य स्थापित हों।

कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए कवि और प्राध्यापक डॉ. विशाल श्रीवास्तव ने नारीवादी आंदोलन के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्त्री अधिकारों का आंदोलन केवल मतदान के अधिकार या शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों तक विस्तार पा चुका है। उन्होंने आधुनिक समय में तकनीक, वैश्वीकरण और बाज़ारवाद के प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिवर्तनों ने स्त्रीवाद के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं, जिन पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।

समाज में अल्पसंख्यक महिलाओं की समस्याओं पर बोलते हुए नाज़िश फातिमा ने कहा कि वित्तीय स्वतंत्रता का प्रश्न आज भी अनेक महिलाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बनाया जाएगा, तब तक वास्तविक समानता की कल्पना अधूरी रहेगी।

ट्रस्ट की सचिव साधना सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे कार्यक्रम का कुशल संयोजन किया। ट्रस्ट के चेयरमैन सत्यभान सिंह ने अपने स्वागत भाषण में ट्रस्ट की गतिविधियों और उद्देश्यों का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि शहीद भगत सिंह के आदर्शों से प्रेरित होकर ट्रस्ट समाज में शिक्षा, जागरूकता और समानता के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने डिजिटल युग में महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के नए अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से महिलाएँ आज नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकती हैं।

ट्रस्ट की सदस्य पूजा श्रीवास्तव ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि नई सदी की महिलाएँ अब केवल पीड़ित या संघर्षरत नहीं हैं, बल्कि वे परिवर्तन की अग्रदूत बनकर समाज को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने युवतियों को आत्मविश्वास और शिक्षा के महत्व को समझने का संदेश दिया। वहीं ऋतु राठौर ने युवतियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए साहस, धैर्य और निरंतर प्रयास की आवश्यकता है।

सम्मान पाने वाली महिलाओं ने साझा किया अनुभव

कानूनी सेवा के क्षेत्र में एडवोकेट भारती सिंह और एडवोकेट सूरभि त्रिपाठी को सम्मानित किया गया। सामाजिक कार्य के क्षेत्र में अमिता सिंह, अनिता पाठक, अंजनी मौर्य, आराधना सिंह, आशा नंदा, बबीता राज, बंदना मौर्य, बीना श्रीवास्तव, इंद्रावती, ज्योति बत्रा, खुशबू शर्मा, ममता साहू, मंजू मौर्य, नाजिश फातिमा, ओमवती, पल्लवी वर्मा, पूजा वर्मा, पूनम पांडेय, रंजना शुक्ला, रानू सिंह, रीना श्रीवास्तव, रेनू सिंह, रेशमा बानो, ऋतु सिंह राठौर, रोशनी यादव, साक्षी वासवानी, संगम यादव, सत्य प्रभा, सरिता सिंह, सीमा सिंह, शिवानी सिंह, श्यामा शर्मा तथा उषा विद्यार्थी को ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों और पर्यावरण अभियानों में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में अंजुला पाठक, अर्चना सिंह, अर्चना गोस्वामी, डॉ. अलका सिंह, डॉ. ममता सिंह, डॉ. नीरजा पांडेय, डॉ. रचना श्रीवास्तव, कहकशां अय्यूब, किरण दीवेदी, ममता सिंह, निशि विद्यार्थी, प्रिया त्रिपाठी और विभा पांडेय को सम्मानित किया गया। चिकित्सा सेवा के लिए डॉ. आकांक्षा सिंह, बैंकिंग सेवा के लिए डॉ. अदिति सिंह, पत्रकारिता के क्षेत्र में ज्योति जायसवाल, कुमकुम भाग्य और मिताली रस्तोगी को सम्मानित किया गया। व्यवसाय के क्षेत्र में कमलेश आनंद, कला (चित्रकला) में नसीम जहरा, संगीत में रमा वर्मा (बांसुरी वादन) और सपना बंसल को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त सुनीता पाठक को सांस्कृतिक क्षेत्र तथा सुनीता सिंह को ट्रेड यूनियन सेवा के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

सम्मान प्राप्त करने वाली कई महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए ट्रस्ट के इस प्रयास की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण बनता है।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए साधना सिंह ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल सम्मान का आयोजन नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति, संघर्ष और उपलब्धियों का उत्सव है, जो शहीद भगत सिंह के समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों से प्रेरित है।

समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार सी. बी. भारती, आर. डी. आनंद, आशाराम जागरथ, नीरज सिन्हा ‘नीर’, रामदास सरल, बृजेश श्रीवास्तव, मांडवी सिंह, नीलम मध्यान, अखिलेश सिंह, वाहिद अली, अनंत सिंह सहित बड़ी संख्या में ट्रस्ट के सदस्य, साहित्य-संस्कृतिकर्मी, पत्रकार और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में उत्साह, विचार-विमर्श और सम्मान का ऐसा वातावरण बना रहा जिसने महिला सशक्तिकरण के संदेश को और अधिक मजबूत किया।
 

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