कोटाः सोमवार को नायक संगठन के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संविधान विरोधी गतिविधियों, भ्रष्टाचार और जनता की आवाज़ दबाने के कई सबूत पेश किए, फिर भी शहर के अधिकारी खामोश हैं। युवाओं ने चेतावनी दी कि अगर सात दिनों के भीतर उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे कोटा से जयपुर तक नंगे पाँव मार्च करेंगे और अगर जयपुर में उनकी बात नहीं सुनी गई, तो जयपुर से दिल्ली तक।
नवभारत युवा एवं जवाबदेह कर्मचारी संघ के सदस्य नायक शशांक ने कहा कि कोटा नगर निगम में ₹100 करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पसंदीदा कंपनी, एसपीएस ट्रैश हैंडलर्स प्राइवेट लिमिटेड को जुर्माना भरने की ज़िम्मेदारी दी गई है। इसका गठन टेंडर जारी होने के बाद हुआ और टेंडर भी दे दिया गया। कोटा के रायपुर स्थित गायत्री विहार स्थित इस फर्म पर नायक संगठन के युवाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि जिस दिन कंपनी बनी थी, उसी दिन एक शुद्धि पत्र भी जारी किया गया था। इसके अलावा, एक पसंदीदा फर्म को ठेका देने के लिए नियम व शर्तें भी वापस ले ली गईं। नायक संगठन के युवाओं ने सरकार, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे सही काम करें, अन्यथा युवा जेल भरेंगे, सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाएंगे और अक्टूबर क्रांति का बिगुल बजाएंगे।
युवाओं ने आरोप लगाया कि कोटा शहर की सड़कें टूटी हुई हैं, आम लोगों की कमर तोड़ रही हैं और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि चल रहा पैचवर्क दो महीने भी नहीं टिकेगा। उन्होंने कोटा दक्षिण निगम बोर्ड को भंग करने की मांग की, जहाँ विपक्ष के नेता और महापौर एक ही पार्टी के हैं। देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में यह पहली बार है, लेकिन सरकार और अधिकारी आँखें मूंदे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह शहर हमारा है, यहाँ के जनप्रतिनिधि हमारे हैं, अधिकारी और प्रशासन हमारा है, लेकिन अब हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। भ्रष्टाचार चरम पर है और कोई सुनने, देखने और बोलने वाला नहीं है। इस अवसर पर नायक अविरल, नायक संदीप, नायक उत्कर्ष, नायक नमन और नायक देवांश उपस्थित थे।
1. लोकतंत्र की हत्या के लिए सरकार जनता से माफ़ी मांगे।
2. पिछले 500 दिनों में दिए गए सभी कार्यों की न्यायिक जाँच हो।
3. नगर निगम बोर्ड भंग करें और लोकतंत्र की हत्या के दौरान नियुक्त सभी चुनाव अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करें।
4. 100 करोड़ रुपये के विवादास्पद टेंडर का निपटारा करें।
5. टेंडर में शामिल सभी अधिकारियों को 17CC का नोटिस देकर निलंबित करें।
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