जेएनयू परिसर में विवादित नारे, विहिप की कड़ी प्रतिक्रिया,कहा–सतर्कता ही आज़ादी की कीमत

खबर सार :-
जेएनयू में हुई भड़काऊ नारेबाजी की घटना ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं पर बहस छेड़ दी है। विहिप का मानना है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन देश की एकता, शांति और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं। सतर्कता, संयम और संवैधानिक प्रक्रिया ही ऐसे मामलों का सही समाधान है।

जेएनयू परिसर में विवादित नारे, विहिप की कड़ी प्रतिक्रिया,कहा–सतर्कता ही आज़ादी की कीमत
खबर विस्तार : -

JNU Slogan Controversy: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में हाल ही में हुई भड़काऊ नारेबाजी की घटना को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया है। विहिप ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की आड़ में इस तरह की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाए।

अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अराजकता स्वीकार्य नहीं

विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी करने की छूट नहीं है। उन्होंने कहा कि “कब्र खोदने जैसे नारे न केवल सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंचाते हैं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरे का संकेत देते हैं।” उनका कहना था कि ऐसे नारे देशवासियों को अंदरूनी खतरों की याद दिलाते हैं और यह सिखाते हैं कि आज़ादी की रक्षा के लिए निरंतर सतर्क रहना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री और संस्थानों को निशाना बनाना निंदनीय

बयान में कहा गया कि जेएनयू की शैक्षणिक और बौद्धिक गरिमा को बार-बार प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक संस्थानों को निशाना बनाने वाले भद्दे नारों से नुकसान पहुंचाया गया है। इस बार कथित तौर पर उकसावे की वजह दिल्ली दंगों के आरोपित उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत न मिलना बताया गया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला

विहिप ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने पाया है कि अभियोजन पक्ष के पास दोनों आरोपितों के खिलाफ दंगों में शामिल होने से जुड़े सीधे और पुष्टि करने वाले सबूत मौजूद हैं। अदालत ने वर्ष 2020 में दिल्ली में हिंदुओं पर हुए सुनियोजित हमलों के पीछे बड़े षड्यंत्र में उनकी केंद्रीय भूमिका पर भी ध्यान दिया है।

ट्रायल का इंतज़ार करना ही संवैधानिक रास्ता

आलोक कुमार ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम पर देश की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ साज़िश रचने जैसे गंभीर आरोप हैं। उन्होंने इसे जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि सभी को संयम बरतते हुए न्यायिक प्रक्रिया और ट्रायल का इंतज़ार करना चाहिए, जहां आरोपितों को अपनी बेगुनाही साबित करने का अवसर मिलेगा।

आधी रात की नारेबाजी पर सवाल

विहिप अध्यक्ष ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ मुट्ठी भर लोगों ने सब्र रखने के बजाय आधी रात को जेएनयू परिसर का माहौल खराब करने का दुस्साहस किया। उन्होंने इस कृत्य को शर्मनाक और कायरतापूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं विश्वविद्यालय की छवि और शैक्षणिक वातावरण को नुकसान पहुंचाती हैं।

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