झांसीः प्रदेश सरकार झांसी मंडल सहित पूरे प्रदेश में 144 एंबुलेंस चला रही है। इसके लिए टोल फ्री नंबर पर कॉल करने से 15 से 20 मिनट में एंबुलेंस बताए गए पते पर पहुंच जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक या स्ट्रोक की स्थिति में मरीज के लिए पहले 3 घंटे महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें गोल्डन आवर भी कहा जाता है यदि कोई मरीज इस अवधि में अस्पताल पहुंच जाए और उसे समुचित चिकित्सा उपचार मिल जाए तो उसके जान के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
किसी भी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में मरीज का जीवन बचाने के लिए जल्दी से जल्दी अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी काम होता है। मरीज जितनी जल्दी अस्पताल पहुंच जायेगा उतनी ही जल्दी उसे उपचार मिलना प्रारंभ हो जाता है और यह जिम्मेदारी नेशनल हेल्थ मिशन की निशुल्क एंबुलेंस सेवा बखूबी निभा रही है। इस एंबुलेंस सेवा से पिछले 6 माह में लगभग 3 लाख से अधिक मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाया और उनके जीवन को बचा लिया गया है।
गंभीर मरीजों को एक चिकित्सालय से दूसरे उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करते समय भी एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस वेंटीलेटर के साथ उपलब्ध कराई जा रही है। एंबुलेंस सेवा को तीन श्रेणियां में बांटा गया है जिन्हें 108 आपातकालीन 102 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य एवं एएलएस एंबुलेंस नाम से जाना जाता है। नेशनल हेल्थ मिशन के मंडलीय परियोजना प्रबंधक आनंद चौबे के अनुसार गर्भवती महिला एवं 1 वर्ष तक के बच्चे को समर्पित 102 एंबुलेंस सेवा घर से अस्पताल में भर्ती करने तक और अस्पताल से छुट्टी मिलने पर घर छोड़ने तक की जिम्मेदारी निभाती है।
प्रत्येक एंबुलेंस में प्रशिक्षित स्टाफ तथा मानक के अनुसार आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहते हैं जिस रास्ते में मरीज को प्राथमिक उपचार मिल जाता है। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। कुछ पुरानी एंबुलेंस के स्थान पर अब नई एंबुलेंस आ चुकी हैं वर्तमान में झांसी मंडल में सभी श्रेणी की 144 एंबुलेंस संचालित हैं। जिसमें झांसी में 108 एंबुलेंस सेवा की 26 और 102 सेवा की 24 एंबुलेंस है।
इस बारे में मंडल आयुक्त झांसी विमल कुमार दुबे का कहना है कि झांसी मंडल में नेशनल हेल्थ मिशन की एंबुलेंस सेवाएं आम लोगों को आपातकालीन स्थिति में जीवनदायनी सिद्ध हो रही है। इन सेवाओं से आम लोगों को निःशुल्क एवं त्वरित रूप से सरकारी चिकित्सा संस्थान में पहुंचा जा रहा है जिससे पीड़ित व्यक्ति को काफी राहत मिलती है।
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