Indore, Contaminated Water: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों की बीमारी के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। भागीरथपुरा इलाके में सामने आई इस गंभीर त्रासदी के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए इंदौर नगर निगम के दो वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि नगर निगम आयुक्त का तबादला कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले को लापरवाही के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रभारी सुपरिटेंडेंट इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड किया गया है। इसके साथ ही इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव का तबादला कर दिया गया। यह निर्णय गुरुवार को भोपाल में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुई हाई-लेवल बैठक के बाद लिया गया, जिसमें पूरे मामले की समीक्षा की गई। सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साफ शब्दों में कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई घटना में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल की मुख्य सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज के कारण पास के एक टॉयलेट स्ट्रक्चर से सीवेज पानी पाइपलाइन में मिल गया। इसी जहरीले पानी के सेवन से इलाके में उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन के गंभीर मामले सामने आए। देखते ही देखते सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए और कई लोगों की जान चली गई। हालांकि मौतों की सही संख्या को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कम से कम सात मौतों की पुष्टि की है, जबकि कांग्रेस और स्थानीय स्तर पर इससे अधिक आंकड़े सामने आ रहे हैं। इस विरोधाभास ने प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव घटना की जानकारी होने के बाद इंदौर पहुंचे और सीधे वर्मा अस्पताल जाकर दूषित पानी से बीमार हुए मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने एक दर्जन से अधिक भर्ती मरीजों से बातचीत की और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रभावित लोगों को बेहतर और समय पर इलाज मिले। मुख्यमंत्री के साथ इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव और शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद रहे। सरकार की ओर से दावा किया गया कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही दोहराई नहीं जाएगी।
इंदौर जिला प्रशासन के मुताबिक अब तक 116 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 36 मरीज स्वस्थ होने के बाद घर लौट चुके हैं। वहीं 100 से ज्यादा लोग अभी भी इलाजरत हैं। मेडिकल टीमों ने घर-घर जाकर 2,700 से अधिक घरों का सर्वे किया है, जिसमें करीब 12,000 लोगों की जांच की गई। इनमें से 1,146 लोगों को हल्के लक्षण मिलने पर मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।
इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर भी असंतोष देखने को मिला है। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस मामले को प्रशासन के लिए “शर्म और अपमान” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिस इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव मिला है, वहां जहरीला पानी लोगों की जान ले रहा है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए व्यवस्था और संकट प्रबंधन पर भी तीखा सवाल उठाया।

मध्य प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दूषित पानी से हुई मौतों को “हत्या” करार देते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन इस घटना पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। पटवारी ने शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि महापौर और दोषी अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इंदौर जितना टैक्स देता है, उसके अनुपात में शहर के विकास पर खर्च क्यों नहीं हो रहा।
भोपाल में युवा कांग्रेस ने इंदौर घटना के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने छोटे तालाब के गंदे पानी में नाव पर बैठकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुतले को दूषित पानी पिलाया और उसी पानी में पुतले को डुबाकर विरोध जताया। इस प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
घरों में सप्लाई होने वाले गंदे पानी को पीने के कारण हुई मौतों के मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी संज्ञान लिया है। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिकारियों और मेडिकल विशेषज्ञों की टीम द्वारा की जा रही जांच पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की जवाबदेही और कड़ी जांच के दायरे में आएगी। फिलहाल, इंदौर दूषित पानी कांड ने शहरी व्यवस्था, स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिला है कि लापरवाही पर कार्रवाई होगी, लेकिन पीड़ित परिवारों को न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना अब सबसे बड़ी चुनौती है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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